कोविड-19 : दूसरा टीका जल्दी लगाने की जरूरत

 

एबीएन डेस्क, रांची। भारत कोविड-19 से बचाव के लिए आंशिक एवं पूर्ण टीकाकरण के असर पर तेजी से मिल रहे तथ्यों एवं आंकड़ों का का अध्ययन कर रहा है। इस बीच, मई के मध्य से इस बात पर भी चर्चा चल रही है कि कोविशील्ड टीके की खुराक के बीच चार से आठ हफ्तों का अंतर दोबारा बहाल किया जाए या नहीं। टीकाकरण कार्यक्रम पर गठित राष्ट्रीय तकनीकी सलाहकार समूह (एनटीएजी) के कोविड-19 कार्यशील समूह के चेयरमैन एन के अरोड़ा ने यह बात कही। यह चर्चा उन खबरों के बाद जोर पकड़ रही है जिनमें कहा गया है कि ब्रिटेन में एस्ट्राजेनेका की एक खुराक कोविड-19 के प्रति केवल 33 प्रतिशत तक असरदार रहा है, जबकि दो खुराक के बाद 60 प्रतिशत तक सुरक्षा मिल जाती है। भारत ने जब कोविशील्ड की दो खुराक के बीच अंतर बढ़ाकर 12 से 16 हफ्ते कर दिया था तब उसके दो-तीन दिन बाद ये आंकड़े सामने आए थे। डीडी न्यूज पर बातचीत में अरोड़ा ने कहा कि कोविड-19 और इसे बचाव के लिए टीकाकरण गतिशील प्रक्रिया है और अगर दो खुराक के बीच अंतराल कम करने से अधिक कारगर नतीजे मिलते हैं तो तकनीकी समिति इस विषय पर अवश्य विचार करेगी। उन्होंने कहा, कल अगर हमें यह बताया जाता है कि पहली और दूसरी खुराक के बीच अंतर कम रखना अधिक कारगर है, भले ही इसका लाभ 5 से 10 प्रतिशत ही अधिक क्यों न हो, समिति तथ्यों पर विचार करने के बाद इस पर निर्णय जरूर लेगी। हां, अगर मौजूदा अंतर ठीक लगा तो हम इसे जारी रखेंगे। दो खुराक के बीच अंतराल बढ़ाने के सरकार के निर्णय पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। इस पर स्वास्थ्य मंत्रालय का कहना है कि वैज्ञानिक आंकड़ों के आधार पर पारदर्शी तरीके से दो यह निर्णय (अंतराल बढ़ाने का) लिया गया था। मंत्रालय ने कहा कि इस निर्णय पर तकनीकी विशेषज्ञों के बीच कोई मतभेद नहीं था। स्वास्थ्य मंत्री हर्ष वर्द्धन ने कहा, आंकड़ों का अवलोकन करने के लिए भारत में मजबूत ढांचा उपलब्ध है। यह अफसोस की बात है कि ऐसे महत्त्वपूर्ण विषय पर राजनीति हो रही है। अरोड़ा ने सीएमसी वेलूर और पीजीआई चंडीगढ़ के अध्ययन का भी हवाला दिया जिनमें कहा गया था कि एक खुराक के साथ टीकाकरण से संक्रमण का खतरा चार प्रतिशत और दो खुराक के साथ करीब पांच प्रतिशत रहता है। उन्होंने कहा, मोटे तौर पर बहुत अंतर नहीं है। टीकाकरण कार्यक्रम के विभिन्न पहलुओं पर विभिन्न स्रोतों से जानकारियां जुटाई जाएंगी और उनके अध्ययन के बाद किसी निष्कर्ष पर पहुंच जाएगा। कोविशील्ड की दो खुराक के बीच अंतर 6-8 हफ्तों से बढ़ाकर 12-16 हफ्ते करने के भारत के निर्णय को पब्लिक हेल्थ इंगलैंड के अध्ययन से भी बल मिला है। इस अध्ययन के नतीजे अप्रैल के अंतिम सप्ताह में सामने आए थे। इस अध्ययन के अनुसार दो खुराक में 12 हफ्तों का अंतर रखने से टीका 65 से 88 प्रतिशत तक असरदार रहता है। वैज्ञानिकों के अनुसार दो खुराक के बीच इतना अंतर रखने की बदौलत ही ब्रिटेन कोविड-19 के अल्फा स्वरूप के फैलने पर अंकुश लगा पाया था। अरोड़ा ने कहा, हमें यह भी लगा कि अंतर अधिक रखना एक अच्छी सोच है। ऐसा इसलिए क्योंकि इस बात के पुख्ता सबूत हैं कि दो खुराक के बीच अंतर अधिक रखने से एडिनोवेक्टर टीके अधिक असरदार साबित होते हैं। इससे लोगों को भी आसानी होती है क्योंकि सभी लोगों के लिए ठीक 12 हफ्तों के अंतर पर आना संभव भी नहीं होता। कनाडा, श्रीलंका और कुछ दूसरे देश एस्ट्राजेनेका के टीके की खुराक के बीच 12-16 हफ्तों का अंतर रख रहे हैं। पहले चार हफ्तों का अंतराल रखने के निर्णय पर अरोड़ा ने कहा कि वह संक्षिप्त परीक्षण के आंकड़ों पर आधारित था। उन्होंने कहा, हमें लगा कि अंतर चार हफ्तों से बढ़ाकर आठ हफ्ते करना चाहिए क्योंकि अध्ययनों में पता चला था कि चार हफ्तों का अंतर रखने से टीका 57 प्रतिशत असरदार रहता है जबकि अंतर आठ हफ्ते करने पर यह 60 प्रतिशत तक कारगर होता है। भारत ने दो खुराक के बीच समय अंतराल बढ़ाने से पहले ब्रिटेन से आंकड़े आने तक इंतजार करने का निर्णय किया था। सरकार ने कहा है कि खुराक के बीच अंतर बढ़ाने की कोविड-19 कार्यशील समूह की सिफारिश पर एनटीएजीआई स्टैंडिग टेक्निकल सब-कमिटी की 13 मई को हुई 31 बैठक में चर्चा हुई थी। जब दो खुराक के बीच समय अंतराल बढ़ाने के समय यह भी निर्णय लिया गया था कि टीकाकरण कार्यक्रम के असर पर नजर रखने के लिए एक व्यवस्था भी तैयार की जाए। मंत्रालय ने कहा कि इस निर्णय पर तकनीकी विशेषज्ञों के बीच कोई मतभेद नहीं था। स्वास्थ्य मंत्री हर्ष वर्द्धन ने कहा, आंकड़ों का अवलोकन करने के लिए भारत में मजबूत ढांचा उपलब्ध है। यह अफसोस की बात है कि ऐसे महत्त्वपूर्ण विषय पर राजनीति हो रही है। इस व्यवस्था के जरिये न केवल टीकाकरण कार्यक्रम के प्रभाव पर नजर रखी जा सकेगी, बल्कि टीके के प्रकार और दो खुराक के बीच अंतर रखने के असर का भी अध्ययन हो सकेगा। इससे यह भी पता चल पाएगा कि जब कोई आंशिक या पूरी खुराक लेता है तो किस तरह के नतीजे मिलते हैं। कोविड-19 और इसे बचाव के लिए टीकाकरण गतिशील प्रक्रिया है और अगर दो खुराक के बीच अंतराल कम करने से अधिक कारगर नतीजे मिलते हैं तो तकनीकी समिति इस विषय पर अवश्य विचार करेगी। उन्होंने कहा, कल अगर हमें यह बताया जाता है कि पहली और दूसरी खुराक के बीच अंतर कम रखना अधिक कारगर है, भले ही इसका लाभ 5 से 10 प्रतिशत ही अधिक क्यों न हो, भारत में ऐसी व्यवस्था बहुत महत्त्वपूर्ण है क्योंकि अब तक 17 से 18 लोगों को केवल एक खुराक दी गई है। चार करोड़ लोगों को दो खुराक लगाई जा चुकी है।

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