एबीएन बिजनेस डेस्क। नई शेयर बाजार में जारी गिरावट ने निवेशकों को चिंता में डाल दिया है। मंगलवार 7 जून को भी बाजार में अच्छी-खासी गिरावट आई। मॉर्गन स्टेनली के मैनेजिंग डायरेक्टर रिदम देसाई बाजार ने बाजार में आई हालिया गिरावट के पीछे कुछ घरेलू और अंतरराष्ट्रीय कारण गिनाए हैं। देसाई का कहना है कि बढ़ती महंगाई बाजार के लिए घातक है। मनीकंट्रोल डॉट कॉम की एक रिपोर्ट के अनुसार, बातचीत में रिदम देसाई ने कहा कि शॉर्ट टर्म में शेयर बाजार एक दायरे में घूमता नजर आएगा। लेकिन, आगे इसमें और गिरावट आ सकती है। रूस-यूक्रेन युद्ध और अमेरिका में मंदी की आहट से निवेशक सहमे हुए हैं। ये दोनों ही कारण फिलहाल शेयर बाजार को गिराने में योगदान दे रहे हैं। रेपो रेट बढ़ाने का हुआ नकारात्मक असर : देसाई ने कहा कि मई में भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा अचानक रेपो रेट में बढ़ोतरी करने का शेयर बाजार पर नकारात्मक असर हुआ है। ब्याज दरों में बढ़ोतरी से निवेशकों में यह संदेश गया कि महंगाई का डर ज्यादा है। उन्होंने कहा कि अगर वित्त वर्ष 2023 में महंगाई ऊंचे स्तर पर रही तो इसका असर देश के विकास पर पड़ेगा। मॉर्गन स्टेनली के एमडी ने कहा कि पाम आॅयल और सूरजमुखी के तेल की कीमतों में बढ़ोतरी और अमेरिकी मार्केट में मंदी की आशंकाएं भारतीय शेयर बाजार को डरा रही हैं। हालांकि, इस समय भारत पहले की तुलना में कीमतों के उछाल का सामना करने के लिए बेहतर स्थिति में है। इन सेक्टर में दिख रही अच्छी संभावना : रिदम देसाई का मानना है कि वित्त वर्ष 2022 में 35 फीसदी एढर ग्रोथ के बाद वित्त वर्ष 2023 में अब एढर में मध्यम स्तर के ग्रोथ की संभावना है। उन्होंने कहा कि इस समय बैंक, आॅटो और रियल एस्टेट स्टॉक अच्छे नजर आ रहे हैं। इनके अलावा ट्रैवल, लेजर, मीडिया और आॅटो एंसिलिरी स्टॉक भी देसाई की नजर में पॉजिटिव हैं। देसाई का कहना है कि सीमेंट सेक्टर अगले 2-3 साल के दौरान अंडरपरफॉर्म करता नजर आ सकता है। फिलहाल ये अच्छा आकार लेता नजर आ रहा है। भविष्य में उत्पादन स्तर में तेजी आने की संभावना है। इसके अलावा इन कंपनियों को बढ़ती मांग से भी फायदा होगा। फर्टिलाइजर की कीमतें बिगाड़ेगी खेल : रिदम देसाई का कहना है कि अगर रूस-यूक्रेन युद्ध जारी रहता तो इससे फर्टिलाइजर की कीमतें बढ़ सकती हैं। युद्ध समाप्?त न हुआ तो भारत को फर्टिलाइजर सब्सिडी पर अगले साल भी भारी खर्च करना होगा। भारत के लिए फर्टिलाइजर की कीमतों में बढ़ोतरी को सहना काफी मुश्किल होगा। अगर देश में उर्वरकों की कीमत बढ़ेगी तो खाद्य पदार्थ महंगे हो जाएंगे। इससे महंगाई बढ़ेगी। महंगाई को नियंत्रित करने के लिए ब्याज दरों में बढ़ोतरी की जाएगी और अंतत: इसका असर ग्रोथ में गिरावट के रूप में सामने आएगा।
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