कड़वा सच : देश में हर 36वें नवजात की एक साल के भीतर हो जाती है मौत

 

एबीएन सेंट्रल डेस्क। भारत में जन्म लेने वाला हर 36वां बच्चा एक वर्ष की आयु तक भी जिंदा नहीं रह पाता है। एक साल से पहले ही किसी न किसी कारण उसकी मौत हो जाती है। यानी वह अपना पहला जन्मदिन भी नहीं मना पाता है। बहुत नवजात शिशुओं की तो 6 महीने और 3 महीने के अंदर ही जान चली जाती है। इसके पीछे कुपोषण और अन्य बीमारियों समेत कई कारण होते हैं। आधिकारिक आंकड़ों से यह पता चलता है कि पिछले कुछ दशकों में नवजात मृत्यु दर में कमी आई है। इसके बावजूद भारत में अभी भी प्रत्येक 36 में से एक शिशु की उसके जन्म के प्रथम वर्ष के अंदर मौत हो जाती है। हेल्थ एक्सपर्ट इस दिशा में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंंत्रालय को और ज्यादा ध्यान देने की जरूरत पर बल डालते हैं। बता दें कि नवजात मृत्यु दर (IMR) को किसी देश या क्षेत्र के संपूर्ण स्वास्थ्य परिदृश्य के एक अहम संकेतक के तौर पर व्यापक रूप से स्वीकार किया जाता है। किसी क्षेत्र में एक निर्धारित अवधि में प्रति एक हजार जन्म पर नवजातों की मृत्यु के रूप में आईएमआर को परिभाषित किया जाता है। यह मृत्यु शिशु के जन्म से एक साल से कम आयु तक की ली जाती है। 1971 में 1000 में 129 शिशुओं की हो जाती थी मौत : भारत के महापंजीयक द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक, आईएमआर का मौजूदा स्तर 1971 की तुलना में एक-चौथाई कम है। 1971 में जहां प्रति एक हजार जीवित शिशु पर 129 नवजात की मौत हो जाती थी, वहीं वर्ष 2020 के लिए यह आंकड़ा प्रति एक हजार जीवित शिशु पर 28 नवजात की मौत का है। पिछले 10 वर्षों में आईएमआर में करीब 36 प्रतिशत की कमी देखी गई है और अखिल भारतीय स्तर पर आईएमआर का स्तर पिछले दशक में 44 से गिर कर 28 हो गया। आंकड़ों के मुताबिक, ग्रामीण इलाकों में यह 48 से घट कर 31 हो गया और शहरी इलाकों में यह 29 से घट कर 19 हो गया। इस तरह क्रमश: करीब 35 प्रतिशत और 34 प्रतिशत दशकीय गिरावट प्रदर्शित होती है। जन्म दर में आई बहुत कमी कहा गया है कि पिछले दशकों में आईएमआर में गिरावट के बावजूद राष्ट्रीय स्तर पर प्रत्येक 36 में एक नवजात की मृत्यु उसके जीवन के प्रथम वर्ष में हो गई। वर्ष 2020 में अधिकतम आईएमआर मध्यप्रदेश (43) में और न्यूनतम मिजोरम (तीन) में दर्ज की गई। बुलेटिन में कहा गया है कि पिछले पांच दशकों में अखिल भारतीय स्तर पर जन्म दर में काफी कमी आई है जो 1971 के 36.9 से घट कर 2020 में 19.5 हो गई। ग्रामीण-शहरी क्षेत्रों में इसका अंतर भी इन वर्षों में कम हुआ है। हालांकि जन्म दर पिछले पांच दशकों में शहरी क्षेत्रों की तुलना में गामीण इलाकों में अधिक बना हुआ है। ग्रामीण और शहरी इलाकों में अंतर : पिछले दशक में जन्म दर करीब 11 प्रतिशत घटी है। यह 2011 के 21.8 से घट कर 2020 में 19.5 हो गयी। ग्रामीण इलाकों में इसमें करीब नौ प्रतिशत की कमी आई है, जो 23.3 से घट कर 21.1 हो गई। वहीं, शहरों इलाकों में यह 17.6 से घट कर 16.1 हो गई जो करीब नौ प्रतिशत की गिरावट है।

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