रांची। झारखंड के मंत्री जगरनाथ महतो सोमवार शाम को नौ माह बाद चार्टर्ड प्लेन से रांची पहुंच गए। जगरनाथ महतो को डॉक्टरों की निगरानी में रांची लाया गया। यहां सीएम हेमंत सोरेन ने उनका स्वागत किया। इसके बाद महतो रांची एयरपोर्ट से सीधे डोरंडा स्थित अपने आवास के लिए रवाना हो गए। इस दौरान उन्होंने हाथ हिलाकर पत्रकारों और लोगों का अभिवादन किया। इससे पहले कोरोना संक्रमण के बाद चेन्नई के एमजीएम अस्पताल में इलाज करा रहे मंत्री जगरनाथ महतो ने इससे पहले अपने चिकित्सकों से मुलाकात की। इस दौरान शिक्षा मंत्री जगरनाथ महतो ने चेन्नई के MGM hospital के चिकित्सकों और अन्य स्टाफ को धन्यवाद दिया। अपने विधानसभा क्षेत्र में टाइगर (TIGER)के नाम से मशहूर शिक्षा मंत्री जगरनाथ महतो ने कहा कि MGM hospital के चिकित्सकों ने जिस तरह से उनका इलाज किया और स्टाफ ने जिस तरह से उनकी देखभाल की उसके लिए इन्हें धन्यवाद देता हूं। मंत्री ने की अस्पताल की तारीफ मंत्री जगरनाथ महतो ने यह भी कहा कि अस्पताल में इलाज और सुविधाएं झारखंड में सुपरहिट हुई हैं। नतीजतन झारखंड के दूसरे लोग भी यहां इलाज के लिए आने लगे हैं। अस्पताल में उनके साथ व्यवहार ने दिल जीत लिया। एयर एंबुलेंस से ले जाया गया था चेन्नई : पिछले साल 28 सितंबर 2020 को शिक्षा मंत्री जगरनाथ महतो की तबीयत खराब हो गई थी। इसके बाद उनको रांची रिम्स में भर्ती कराया गया था। फेफड़ों में संक्रमण की वजह से तीन दिन बाद उन्हें मेडिका (medica) में भर्ती कराया गया। इस बीच उनकी कोरोना जांच की गई जो पॉजिटिव आई। करीब एक महीने तक रांची में उनका इलाज चला। स्वास्थ्य में सुधार नहीं होने पर 19 अक्टूबर को उन्हें एयर एंबुलेंस के जरिये रांची से चेन्नई लाया गया। चेन्नई में उन्हें एमजीएम अस्पताल में भर्ती कराया गया। 28 अक्टूबर को अस्पताल की तरफ से एक मेडिकल बुलेटिन जारी किया गया था, जिसमें उनके फेफड़ों में कोई सुधार नहीं दिखा, तब डॉक्टर्स ने लंग्स ट्रांसप्लांट करने का निर्णय लिया। 10 नवंबर को जगरनाथ महतो का लंग्स ट्रांसप्लांट किया गया। 11 जनवरी को उन्हें आईसीयू से जनरल वॉर्ड में शिफ्ट किया गया था। अभी उनका लंग्स 100 प्रतिशत काम कर रहा है। करीब 8 महीने के बाद वो चेन्नई से कोरोना को हराकर झारखंड लौट रहे हैं। इस खबर से झारखंड के उनके चाहने वालों और समर्थकों में खुशी है। मंत्री जगरनाथ महतो का परिचय जगरनाथ महतो ने मैट्रिक तक शिक्षा हासिल की है। उन्होंने राजनीतिक करियर की शुरुआत 1990 में की। उन्होंने तत्कालीन विधायक शिवा महतो के सहयोगी के रूप में राजनीति शुरू की। उन्होंने पहली बार 2000 में समता पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ा था, लेकिन वे चुनाव हार गए थे। इसके बाद 2005 में जेएमएम में इन्हें डुमरी से अपना प्रत्याशी बनाया। उसके बाद से लगातार चौथी बार डुमरी से विधायक बने।
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