एबीएन बिजनेस डेस्क। मार्च तिमाही के जीडीपी (GDP) आंकड़े जारी हो गए हैं। चौथी तिमाही में भारत की अर्थव्यवस्था में 4.1 प्रतिशत की ग्रोथ देखने को मिली है। जिसकी वजह से पिछले पूरे वित्त वर्ष में विकास दर 8.7 प्रतिशत पर पहुंच गई। जानकार पहले ही अनुमान लगा रहे थे कि दिसंबर तिमाही की रिकवरी पर मार्च तिमाही के दौरान बढ़ती महंगाई (Inflation) और ओमीक्रॉन को लेकर डर का असर पड़ेगा। हालांकि आज आए मार्च तिमाही के आंकड़े कई संस्थानों के अनुमानों से बेहतर रहे हैं। अधिकांश जानकारों के अनुमान 4 प्रतिशत या उससे नीचे के थे। चौथी तिमाही की ग्रोथ इससे पिछली तिमाही के मुकाबले सुस्त रही है। दिसंबर तिमाही में विकास दर 5.4 प्रतिशत थी। हालांकि पिछले साल की इसी तिमाही के मुकाबले ग्रोथ के आंकड़े बेहतर रहे हैं। जब 2020-21 की चौथी तिमाही में जीडीपी 2.5 प्रतिशत की दर से बढ़ी थी। वहीं पिछले वित्त वर्ष में 8.7 प्रतिशत की ग्रोथ के मुकाबले 2020-21 में अर्थव्यवस्था 6.6 प्रतिशत की दर से घटी थी, इस दौरान भारतीय अर्थव्यवस्था पर कोरोना का असर था। एनएसओ ने अपने दूसरे अनुमान में 2021-22 के दौरान 8.9 प्रतिशत की ग्रोथ की बात कही थी। हालांकि 2022 की शुरुआत में ओमीक्रॉन के असर की वजह से कारोबारी गतिविधियों पर कुछ असर देखने को मिला जिससे अंतिम आंकड़े अनुमानों से कम रहे।
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