गुड न्यूज... केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने किया 5जी वॉइस और वीडियो कॉल

 

एबीएन सेंट्रल डेस्क। केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने गुरुवार को आईआईटी मद्रास में 5जी कॉल का सफल परीक्षण किया। वीडियो और वॉइस कॉल कर उन्होंने 5जी कॉल का टेस्ट किया। बता दें कि इसे भारत में ही डिजाइन और विकसित किया गया है। सफल परीक्षण के बाद केंद्रीय मंत्री ने कहा, ह्यहमें आईआईटी मद्रास टीम पर गर्व है, जिसने 5जी टेस्ट पैड को विकसित किया है, जो संपूर्ण 5जी विकास पारिस्थितिकी तंत्र और हाइपरलूप पहल को बड़े अवसर प्रदान करेगा। रेल मंत्रालय हाइपरलूप पहल का पूरा समर्थन करेगा। गौरतलब है कि भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण (ट्राई) के रजत जयंती समारोह को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को कहा था कि अगले डेढ़ दशकों में 5ॠ से देश की अर्थव्यवस्था में 450 अरब डॉलर का योगदान होने वाला है और इससे देश की प्रगति और रोजगार निर्माण के अवसर को गति मिलेगी। उन्होंने कहा कि 21वीं सदी के संपर्क यानी कनेक्टिविटी, देश की प्रगति की गति को निर्धारित करेगी। इस दौरान पीएम मोदी ने आईआईटी मद्रास के नेतृत्व में कुल आठ संस्थानों द्वारा बहु-संस्थान सहयोगी परियोजना के रूप में विकसित 5जी टेस्ट बेड की भी शुरूआत की। इसके अलावा उन्होंने एक डाक टिकट भी जारी किया था। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, ह्यमुझे देश को अपना, खुद से निर्मित 5जी टेस्ट बेड राष्ट्र को समर्पित करने का अवसर मिला है। ये दूरसंचार क्षेत्र में क्रिटिकल और आधुनिक टेक्नॉलॉजी की आत्मनिर्भरता की दिशा में भी एक अहम कदम है। मोदी ने कहा कि 5जी के रूप में जो देश का अपना 5जी मानदंड बनाया गया है, वह देश के लिए बहुत गर्व की बात है और यह देश के गांवों में 5जी प्रौद्योगिकी पहुंचाने में बड़ी भूमिका निभाएगा। उन्होंने कहा, 21वीं सदी के भारत में कनेक्टिविटी, देश की प्रगति की गति को निर्धारित करेगी। इसलिए हर स्तर पर कनेक्टिविटी को आधुनिक बनाना ही होगा। पीएम मोदी ने कहा कि 5जी प्रौद्योगिकी देश के शासन में, जीवन की सुगमता में और व्यापार की सुगमता में सकारात्मक बदलाव लाने वाली है तथा इससे खेती, स्वास्थ्य, शिक्षा, अवसंरचना और हर क्षेत्र में प्रगति को बल मिलेगा। जल्द 5जी बाजार में आये : मोदी- प्रधानमंत्री ने कहा कि जल्द से जल्द 5जी बाजार में आए, इसके लिए सामूहिक प्रयास की आवश्यकता है। उन्होंने कहा, इस दशक के अंत तक 6जी सेवा आरंभ हो पाए, इसके लिए एक कार्य बल काम करना शुरू कर चुका है। बता दें कि 5जी से जुड़ी इस परियोजना में भाग लेने वाले अन्य संस्थानों में आईआईटी दिल्ली, आईआईटी हैदराबाद, आईआईटी बॉम्बे, आईआईटी कानपुर, आईआईएस बैंगलोर, सोसाइटी फॉर एप्लाइड माइक्रोवेव इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग एंड रिसर्च (एसएएमईईआर) और सेंटर आॅफ एक्सीलेंस इन वायरलेस टेक्नोलॉजी (सीईडब्लूआईटी) शामिल हैं।

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