महाराज नंदी जी को मिला 353 वर्ष की तपस्या का प्रतिफल, मिला ज्योतिर्लिंग

 

एबीएन सेंट्रल डेस्क। वाराणसी के ज्ञानवापी में आज सर्वे के दौरान बाबा विश्वनाथ का स्वयंभू ज्योतिर्लिंग मिल गया, जो सनातन हिंदू समाज के लिए एक हर्ष का विषय है। भारतवर्ष सनातन हिंदुओं का देश है, परन्तु मुस्लिम आक्रांताओं के द्वारा सनातन परंपरा को नष्ट करने के उद्देश्य हजारों अराध्य स्थलों के नष्ट करने का दु:साहस किया गया था। इसी कड़ी में आज से 353 वर्ष पूर्व आक्रांता औरंगजेब ने बाबा विश्वनाथ के स्वयंभू ज्योतिर्लिंग तथा मंदिर को क्षति पहुंचाने की चेष्टा की थी। इस ज्योतिर्लिंग की सुरक्षा में नंदी महाराज ने 353 वर्ष तक तपस्या कर रहे थे। आज भगवान शिव के दिवस सोमवार एवं महात्मा बुद्ध के जन्म दिवस पर बाबा विश्वनाथ के स्वयंभू ज्योतिर्लिंग सर्वे टीम के समक्ष अपने को दर्शन देकर संपूर्ण सनातन हिंदू समाज को अपने अतीत से परिचय कराने के साथ-साथ महाराज नंदी का तपस्या को भी पूर्ण किए।आक्रांताओं के क्रूरता द्वारा वर्षों पूूर्व हमारे सनातनी समाज एवं हमारे धर्म स्थलों को नष्ट करने जो षड्यंत्र चलाया गया था, आज संपूर्ण विश्व उसे देख रहा है। कट्टरपंथी मुस्लिमों के द्वारा 1947 का पहले का जो वक्तव्य दिया जा रहा है, यह बिल्कुल निराधार है। यह मंदिर 1947 का नहीं बल्कि प्राचीन मंदिर है। विगत 353 वर्ष से हिंदू समाज ने सदैव बाबा विश्वनाथ जी के स्वयंभू ज्योतिर्लिंग को प्राप्त करने के संघर्ष कर रहे थे। ऐसे कट्टरपंथियों से हिन्दू समाज को सचेत रहने की आवश्यकता है एवं न्यायालय की न्याय के प्रति अविश्वास रखने वालों पर हिंदू समाज को कठोरता से उत्तर देने की आवश्यकता है। ज्ञानवापी भगवान विश्वनाथ का था, आज भी है और सदैव रहेगा। भगवान बाबा विश्वनाथ के अलौकिक दर्शन हेतु समस्त हिंदू जनमानस को हार्दिक शुभकामनाएं...। उक्त जानकारी विश्व हिंदू परिषद, झारखंड के प्रांत मंत्री डॉ बिरेन्द्र साहू ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर दी।

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