एबीएन बिजनेस डेस्क। शेयर बाजारों में बृहस्पतिवार को लगातार पांचवें कारोबारी सत्र में गिरावट आयी। वैश्विक स्तर पर नकारात्मक रूख के बीच सेंसेक्स और निफ्टी दो प्रतिशत और नीचे आ गये। विदेशी संस्थागत निवेशकों की बिकवाली से भी बाजार की धारणा प्रभावित हुई। अप्रैल की मुद्रास्फीति और मार्च के औद्योगिक उत्पादन के आंकड़ों की घोषणा से पहले निवेशक सतर्क रुख अपना रहे हैं। बीएसई का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 1,158.08 अंक यानी 2.14 प्रतिशत फिसलकर 53,000 अंक के स्तर से नीचे 52,930.31 अंक पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान यह एक समय 1,386.09 अंक तक फिसलकर 52,702.30 अंक के स्तर तक आ गया था। इसी तरह नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी भी 359.10 अंक यानी 2.22 प्रतिशत लुढ़कर 15,808 अंक पर बंद हुआ। मेहता इक्विटीज के उपाध्यक्ष-शोध प्रशांत तापसे ने कहा, ह्यइसमें कोई शक नहीं है कि गिरावट का सबसे बड़ा कारण सभी वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं में मुद्रास्फीति है। दुनियाभर के शेयर बाजारों की नजर अमेरिका के केंद्रीय बैंक के ब्याज दरों को लेकर अगले कदम पर टिकी हुई है। सेंसेक्स में शामिल कंपनियों में इंडसइंड बैंक, टाटा स्टील, बजाज फाइनेंस, बजाज फिनसर्व, एचडीएफसी बैंक, एक्सिस बैंक, एचडीएफसी, टाइटन, एनटीपीसी और भारतीय स्टेट बैंक के शेयर नुकसान में रहे। दूसरी तरफ केवल विप्रो और एचसीएल टेक्नोलॉजीज के शेयर लाभ में थे। एशिया के अन्य बाजारों... जापान का निक्की, हांगकांग का हैंगसेंग, चीन का शंघाई कंपोजिट और दक्षिण कोरियो के कॉस्पी में भी गिरावट रही। यूरोप के बाजार दोपहर के सत्र में नुकसान के साथ कारोबार कर रहे थे। इसके पहले अमेरिकी शेयर बाजारों में बुधवार को गिरावट दर्ज की गई। इस बीच, अंतरराष्ट्रीय तेल मानक ब्रेंट क्रूड 2.02 प्रतिशत गिरकर 105.7 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। शेयर बाजार के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी निवेशकों ने बुधवार को 3,609.35 करोड़ रुपये मूल्य के शेयर बेचे।
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