शमा प्रवीण के संघर्ष को मिला समाजसेवी रजनी बाला का साथ

 

टीम एबीएन, कोडरमा। फानूस बनकर जिसकी हिफाजत हवा करे, वह शम्मा क्या बुझे जिसे रोशन खुदा करे... यह गंभीर चंद लाइनें आज कोडरमा की रातों रात मशहूर हुई मजदूरन बेटी शमा परवीन पर काफी सटीक बैठती है। यह वही शमा प्रवीण है जो ढिब्रा उद्योग को पुनर्जीवित करने और अपने पिता और चाचा के साथ हुए जुल्म के खिलाफ प्रशासन ही नहीं बल्कि सरकार तक को आईना दिखा गई। बदहाल जिंदगी और बेबस दिनों से जूझती जिले के पूरे मजदूर वर्ग के लोगों की मासूम आवाज बनी शमा परवीन को अब तक के कोई राजनैतिक चेहरे ने उसके मनोबल को नहीं बढ़ाया, इसी बीच शमा परवीन की साहस और हिम्मत के साथ व्यवस्था से लड़ने के जुनून को देखते हुए कोडरमा की समाजसेवी रजनी बाला स्वयं उसके घर पहुंची। शमा प्रवीण एवं ढिबरा उद्योग से जुड़े सभी लोगों से मजदूरों की गाथा सुन समाजसेवी रजनी बाला ने शमा परवीन की हौसला अफजाई करते हुए उसके मनोबल को बढ़ाया और साथ ही किसी भी तरह की समस्या होने पर नि:संकोच संपर्क करने की बात कह मदद करने का भरोसा दिलाया। उन्होंने आईएएस बनने की तमन्ना रखने वाली बहादुर शमा परवीन के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए उसे शैक्षणिक किट उपहार में दिया। इधर, मीडिया के बाद सामाजिक सम्मान और हिम्मत मिलने से शमा प्रवीण काफी खुशी और उत्साहित है। समाजसेवी रजनी बाला ने कहा की यह बड़ी विडंबना है की कोडरमा के मजदूर वर्ग के लोग आज भी अपनी जिंदगी के लिए संघर्ष कर रहे हैं। आज उनके सामने भुखमरी की समस्या है बच्चों को पढ़ाना तो दूर उन्हें दो वक्त की रोटी भी मुहैया नहीं करा पाते। यह स्थिति सरकार के योजनाओं पर जोरदार तमाचा है। उन्होंने कहा कि प्रशासन ही नहीं सरकार स्तर से इस बड़ी समस्या के निराकरण के लिए ठोस कानून बनाने की जरूरत है ताकि मजदूर वर्ग के लोगों के अच्छे दिन लौटे और सभी खुशहाल जीवन जी सकें।

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