एबीएन सेंट्रल डेस्क। पाकिस्तान में कई दिनों तक चले सियासी ड्रामे के बाद शनिवार देर रात आखिरकार इमरान खान सरकार को अविश्वास प्रस्ताव में हार का सामना करने के बाद सत्ता से बाहर होना पड़ा है। पाकिस्तान के नेशनल एसेंबली में विपक्ष के लाए अविश्वास प्रस्ताव के पक्ष में 174 वोट पड़े। ऐसे में उम्मीद जताई जा रही है कि नेशनल असेंबली में विपक्ष के नेता शाहबाज शरीफ अब पाकिस्तान में प्रधानमंत्री की कुर्सी संभालेंगे। शाहबाज शरीफ का नाम बतौर पीएम विपक्ष ने इमरान खान की सरकार को गिराने से पहले ही घोषित कर दिया था। पाकिस्तान में आज तक कोई भी प्रधानमंत्री अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर सका है। ऐसे में इमरान खान पाकिस्तान के इतिहास में पहले ऐसे प्रधानमंत्री भी बन गए हैं जिन्हें अविश्वास प्रस्ताव के जरिए सत्ता से बाहर का दरवाजा दिखाया गया है। कौन हैं शाहबाज शरीफ : 70 वर्षीय शहबाज शरीफ पाकिस्तान करे तीन बार के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के छोटे भाई हैं। वे एक कुशल प्रशासक के तौर पर भी जाने जाते हैं। खासकर वे जब पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के मुख्यमंत्री थे तो उन्होंने अपने शासन की शैली को दिखाया। पंजाब के मुख्यमंत्री के रूप में शहबाज शरीफ ने कई बुनियादी ढांचो वाली मेगा-परियोजनाओं पर काम किया। नवाज शरीफ से इतर शहबाज शरीफ को पाकिस्तान में सेना के साथ सौहार्दपूर्ण संबंध बनाए रखने के लिए भी जाना जाता है। माना जाता है कि उनका भारत के प्रति रूख भी अधिक सकारात्मक है। शाहबाज शरीफ 13 अगस्त 2018 से पाकिस्तान के नेशनल असेंबली के सदस्य हैं। शाहबाज सबसे ज्यादा लंबे समय तक पंजाब के मुख्यमंत्री रहने वाले नेता हैं। वे फिलहाल पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (PML-N) पार्टी के अध्यक्ष हैं। यह पार्टी इमरान की पाकिस्तान तहरीक-ए- इंसाफ (PTI) के बाद नेशनल असेंबली में फिलहाल दूसरी सबसे बड़ी पार्टी है। भारत से नाता : शाहबाद शरीफ का जन्म लाहौर में बड़े कारोबारी घराने में 23 सितंबर 1951 को हुआ। उन्होंने लाहौर की एक सरकारी यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन किया और परिवार के बिजनेस को संभाला। उनके पिता मुहम्मद शरीफ एक कारोबारी थे। वे कारोबार के सिलसिले में अक्सर कश्मीर के अनंतनाग आया-जाया करते थे। बाद में उनका परिवार अमृतसर में बस गया। साल 1947 में बंटवारे के बाद परिवार लाहौर जाकर बस गया। शाहबाज शरीफ की मां पुलवामा की रहने वाली थीं। 1997 में पहली बार बने मुख्यमंत्री : परिवार का बिजनेस संभालते हुए शाहबाज ने 1980 के दशक में पंजाब में राजनीति में प्रवेश किया। साल 1997 में पहली बार मुख्यमंत्री बने। 1999 में पाकिस्तान में सैन्य तख्तापलट के बाद शाहबाज शरीफ को परिवार सहित देश छोड़ सऊदी अरब जाना पड़ा। वह साल 2007 में फिर पाकिस्तान लौटे और 2008 में फिर पंजाब के मुख्यमंत्री बने। नवाज शरीफ का 2017 में पनामा पेपर्स के खुलासे में नाम आया है। इसके बाद शाहबाज शरीफ को PML-N पार्टी का प्रमुख बनाया गया और वे इस तरह राष्ट्रीय राजनीति में उतरे। साल 2018 के चुनाव में इमरान के PTI की जीत हुई और शाहबाद नेता विपक्ष बने। साल 2020 में शाहबाज शरीफ को मनी लॉन्ड्रिंग के एक मामले में गिरफ्तार भी किया गया। हालांकि पिछले साल अप्रैल में लाहौर हाईकोर्ट से उन्हें जमानत मिल गई। कुल मिलाकर नवाज शरीफ और शाहबाज दोनों भाइयों को भ्रष्टाचार के कई मामले हैं पर शाहबाज को किसी भी आरोप में दोषी नहीं पाया गया है।
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