एलआईसी में अब और बिक्री नहीं...

 

एबीएन डेस्क (निकुंज ओहरी)। केंद्र भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) के शेयर बाजारों में सूचीबद्घ होने के कम से कम दो साल बाद तक इस कंपनी में अपनी हिस्सेदारी शायद कम नहीं करेगा। माना जा रहा है कि हिस्सेदारी घटाने से इस बड़े आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) में हिस्सा ले रहे निवेशकों के प्रतिफल पर असर पड़ सकता है। निवेश की इच्छा रखने वाले कई पक्षों ने न्यूनतम सार्वजनिक शेयरधारिता की जरूरत पूरी करने के लिए इस बीमा कंपनी में अपनी हिस्सेदारी घटाने की केंद्र सरकार की योजना के बारे में पूछा था। सरकार ने इस बारे में अपना रुख रोडशो के दौरान उन्हें बता दिया। केंद्र ने कहा कि वह कम से कम दो साल तक एलआईसी में अपनी हिस्सेदारी घटाने के बारे में नहीं सोचेगा ताकि कंपनी के शेयरों में गिरावट नहीं आए। निवेशकों को बताया गया कि बीमा कंपनी के पास अगले दो साल के लिए पर्याप्त पूंजी है। एक अधिकारी ने बताया कि निवेश की इच्छा रखने वालों ने रोडशो के दौरान भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) के नियमों का हवाला देकर चिंता जताई थी। सेबी के मुताबिक सभी कंपनियों को न्यूनतम सार्वजनिक शेयरधारिता के नियमों पर खरा उतरना पड़ेगा। निवेशकों को चिंता थी कि सरकार पहले पांच साल तक हर साल एलआईसी में 5 फीसदी शेयर बेच देगी। उन्होंने बताया कि एलआईसी अधिनियम में किए गए संशोधनों के मुताबिक सूचीबद्घ होने के बाद पांच साल तक सरकार को इस बीमा कंपनी में कम से कम 75 फीसदी हिस्सेदारी बनाए रखनी पड़ेगी। अधिकारी ने कहा, कानून में साफ कहा गया है कि सरकार अपनी हिस्सेदारी 75 फीसदी से कम नहीं कर सकती। साथ ही केंद्र अपनी हिस्सेदारी उस सीमा के ऊपर रख सकता है। सरकार ने इस बात पर भी जोर दिया कि वह एलआईसी में बार-बार शेयर नहीं बेचेगी और बैंकों समेत सार्वजनिक उपक्रमों को न्यूनतम सार्वजनिक शेयरधारिता सीमा पूरी करने की शर्त से विशेष छूट दी गई है। अधिकारी ने बताया कि एलआईसी के लिए न्यूनतम सार्वजनिक शेयरधारिता की शर्त से छूट मांगी जाएगी क्योंकि सरकार ने सूचीबद्धता के पांच साल बाद तक इसमें अपनी हिस्सेदारी 75 फीसदी से नीचे नहीं ले जाने का फैसला किया है। निर्गम के बाद 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक आकार वाली कंपनियों को पांच साल तक कम से कम 25 फीसदी सार्वजनिक शेयरधारिता रखनी ही होती है। अधिकारी ने बताया कि सरकार ने रोडशो के दौरान स्पष्ट संकेत दिया कि वह अगले साल अनुवर्ती सार्वजनिक निर्गम या ओएफएस नहीं लाएगी क्योंकि इससे शेयर का भाव गिर सकता है। यह बात एलआईसी के आईपीओ में दिलचस्पी दिखाने वालों से कही गई ताकि वे इस पर दांव लगाने से पीछे नहीं हट जाएं। केंद्र एलआईसी के आईपीओ में शेयरों का आवंटन बढ़ाने पर भी विचार कर रहा है ताकि यह सेबी के सूचीबद्घता के निर्देशों पर खरा उतरे। बाजार नियामक ने बीमाकर्ता के अद्यतन निर्गम दस्तावेज को मंजूरी दे दी है, जिससे देश के इस सबसे बड़े आईपीओ के लिए रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस दाखिल करने का रास्ता साफ हो गया है।

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