एबीएन सेंट्रल डेस्क। झारखंड सहित तमिलनाडु एवं अन्य राज्यों की शिकायत के बाद बिजली उत्पादन करने वाली निजी कंपनियों की मनमानी पर केंद्रीय विद्युत नियामक आयोग ने लगाम लगाया है। अब भीषण गर्मी में राज्य लगभग 40 प्रतिशत कम दर पर इंडियन एनर्जी एक्सचेंज से अतिरिक्त बिजली का प्रबंधन कर आपूर्ति सामान्य बनाये रख सकेंगे। इंडियन एनर्जी एक्सचेंज से राज्य शून्य से 12 रुपये प्रति यूनिट की दर पर बिजली खरीद सकेंगे। पिछले कुछ दिनों से राज्यों को 20 रुपये प्रति यूनिट की दर पर बिजली खरीदने के लिये मजबूर होना पड़ रहा था। ऊर्जा मंत्रालय को झारखंड की ओर से यह शिकायत की गई कि बिजली उत्पादन करने वाली विभिन्न निजी कंपनियां डिस्कॉम पर बकाया की आड़ लेकर इंडियन एनर्जी एक्सचेंज को महंगी दर पर बिजली बेच रही हैं। इस कारण राज्यों को इंडियन एनर्जी एक्सचेंज से लगातार 20 रुपये प्रति यूनिट की महंगी दर पर बिजली उपलब्ध हो रही है। जबकि यह आठ से दस रुपये के करीब उपलब्ध होती रही है। पूर्व में भी ऐसी स्थिति बनती थी, लेकिन बहुत कम समय तक ऐसे हालात रहते थे। इस बार 20 रुपये की दर कई दिनों तक बनी रही। तमिलनाडु और झारखंड की ओर से ऊर्जा मंत्रालय को पूरा मामला संज्ञान में लाया गया। बताया गया कि बिजली उत्पादन करने वाली निजी कंपनियां समझौते के विरुद्ध जाकर राज्यों को कम बिजली देकर महंगी दर पर इंडियन एनर्जी एक्सचेंज को बिजली बेच रही हैं। इससे राज्यों को जितनी बिजली कम दर पर मिल सकती थी वह भी बहुत महंगी दर पर खरीदनी पड़ रही है। झारखंड की ओर से जेबीवीएनएल के महाप्रबंधक ऋषिनंदन ने खासतौर पर कहा कि गरीब राज्यों को बिजली आपूर्ति सामान्य बनाये रखने में बड़ी परेशानी पेश आ रही है। राज्यों की आपत्ति के बाद केंद्रीय विद्युत नियामक आयोग ने आदेश दिया है कि दिन के समय या एक दिन पूर्व इंडियन एनर्जी एक्सचेंज से बिजली खरीदने के लिये शून्य से अधिकतम 12 रुपये प्रति यूनिट की दर से बोली लगाई जाएगी। ससमय अतिरिक्त बिजली खरीद पर नया आदेश शनिवार से ही लागू हो गया है। एक दिन एडवांस में खरीद पर नया आदेश रविवार से लागू होगा। नया आदेश लागू होने के बाद झारखंड बिजली वितरण निगम (जेबीवीएनएल) को इंडियन एनर्जी एक्सचेंज से बिजली खरीदने पर प्रतिदिन तीन करोड़ रुपये की बचत होगी। एक्सचेंज से जेबीवीएनएल प्रतिदिन करीब पांच करोड़ रुपये की अतिरिक्त बिजली का प्रबंध करता था। अब दो करोड़ रुपये में राज्य को बिजली की अतिरिक्त जरूरत जो करीब 150 से 200 मेगावाट तक बन रही है को पूरा किया जा सकेगा।
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