सेना और आईएसआई से अनबन कर सकती है पाकिस्तान की इमरान सरकार

 

एबीएन सेंट्रल डेस्क। एक कहावत है कि डूबते को तिनके का सहारा। कुछ ऐसी ही स्थिति पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान की है वरना यह बता पाना मुश्किल होगा कि 25 मार्च को अविश्वास प्रस्ताव का सामना करने से पहले उन्होंने हाल ही में भारत की स्वतंत्र विदेश नीति की सराहना किसलिए की थी। इमरान खान के खिलाफ 25 मार्च को नेशनल असेंबली में अविश्वास प्रस्ताव पेश किया जाएगा। उनके विरोधी पूरी तरह आश्वस्त हैं कि खान को सत्ता छोड़नी होगी। बीते शुक्रवार को इमरान खान ने भारत द्वारा प्रतिबंधों के बावजूद रूस से कच्चा तेल खरीदने के फैसले पर बात की थी। समाचार एजेंसी एएनआई की एक रिपोर्ट के अनुसार प्रधानमंत्री खान ने खैबर पख्तूनख्वा में एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहा था कि उनकी (भारत की) नीति लोगों की बेहतरी के लिए है। ऐसा प्रतीत हो रहा है कि इमरान खान को एक असफल देश की सरकार का नेतृत्व करने की अपनी बड़ी गलती का अहसास हो गया है। सेना के साथ अनबन भी खड़ी कर सकती है मुश्किलें : अगर इमरान खान सत्ता से बाहर हो जाते हैं तो यह एक बार फिर स्थापित हो जाएगा कि पाकिस्तान में लोकतंत्र स्थापित नहीं हो सकता है। यह ऐसा देश है जहां सेना और इसकी शक्तिशाली इकाई इंटर-सर्विस इंटेलिजेंस (आईएसआई) सब कुछ नियंत्रित करते हैं। इमरान खान ने सेना को नाराज किया है। पाकिस्तान में किसी भी राजनीतिक दल के लिए सत्ता में रहने के लिए राजनीतिक रूप से मजबूत सेना का सहयोग बहुत आवश्यक माना जाता है। पाक सेना के प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा आईएसआई के महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल फैज हमीद को पेशावर की 11वीं कॉर्प्स का कमांडर बनाना चाहते हैं और उनके स्थान पर लेफ्टिनेंट जनरल नदीम अंजुम को आईएसआई की कमान देना चाहते थे। सेना में रुटीन ट्रांसफर की तरह देखी जा रही इस योजना का प्रधानमंत्री इमरान खान ने विरोध किया था। उन्होंने इस बारे में औपचारिक अधिसूचना जारी करने से भी इनकार कर दिया था। माना जा रहा है इमरान खान फैज हमीद पर बहुत ज्यादा निर्भर हो गए थे और आईएसआई का इस्तेमाल वह अपने राजनीतिक अस्तित्व को बचाने के लिए कर रहे थे। अंतत: अक्तूबर 2021 में इमरान खान को जनरल बाजवा की ओर से पेश किए गए तीन नामों में से एक लेफ्टिनेंट जनरन नदीम अहमद को आईएसआई का अगला महानिदेशक चुनना पड़ा था। उन्हें सेना प्रमुख को बदलने की किसी भी कोशिश के लिए चेतावनी भी दी जा चुकी है। कुछ ऐसा है पाकिस्तान की नेशनल असेंबली का गणित पाकिस्तान की 342 सदस्यों वाली नेशनल असेंबली में इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के पास केवल 155 सीटें हैं। इसके अलावा उसके पास छह गठबंधन भागीदारों का समर्थन है, जिनके पास 23 सीटें हैं। इमरान खान को प्रधानमंत्री बने रहने के लिए 172 और उन्हें हटाने के लिए विपक्ष को 172 मतों की आवश्यकता है। अगर इमरान के सहयोगी दल उनका साथ छोड़ देते हैं तो उनके लिए मुश्किल हो सकती है। इमरान खान के खिलाफ पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (पीएमएल-एन) और पाकिस्तान पीपल्स पार्टी (पीपीपी) के 100 से अधिक सांसदों ने अविश्वास प्रस्ताव जमा किया है। उधर, इमरान की अपनी पीटीआई में भी दरारें देखने को मिल रही हैं। गठबंधन के एक प्रमुख सहयोगी पाकिस्तान मुस्लिम लीग-कायद ने भी प्रधानमंत्री के रूप में इमरान खान का विरोध किया है। ये सब बातें इस ओर इशारा कर रहे हैं कि इमरान खान की राह आसान नहीं है। इमरान के तीन सहयोगी दल मिला सकते हैं विपक्ष से हाथ बता दें कि पाकिस्तान की नेशनल असेंबली के स्पीकर ने 25 मार्च से निचले सदन का सत्र बुलाया है। विपक्ष इसमें इमरान सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव ला रहा है। वहीं, खबर आई है कि इमरान खान के तीन बड़े सहयोगी दलों ने विपक्ष से हाथ मिलाने का फैसला किया है। ये दल हैं- मुत्ताहिदा कौमी मूवमेंट पाकिस्तान, पाकिस्तान मुस्लिम लीग (क्यू) और बलूचिस्तान अवामी पार्टी। तीनों पार्टियां जल्द ही विपक्ष के साथ जाने की घोषणा कर सकती हैं।

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