टीम एबीएन, रांची। जानलेवा हमला, सरकारी कार्य में बाधा समेत कई अन्य आरोपों में पूर्व कृषि मंत्री योगेंद्र साव एवं उनकी पत्नी पूर्व विधायक निर्मला देवी (तत्कालीन विधायिका) को अदालत ने दोषी करार दिया है। जबकि पुत्र अंकित राज को अदालत ने साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया है। अपर न्यायायुक्त विशाल श्रीवास्तव की अदालत ने मंगलवार को बड़कागांव कांड संख्या 228/2016 मामले में फैसला सुनाया। साथ ही सजा के बिन्दु पर सुनवाई के लिए 24 मार्च की तारीख निर्धारित की है। फैसले के समय मां-बेटा कोर्ट में उपस्थित थे। जबकि योगेंद्र साव को जेल से ही वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्य्म से अदालत में पेश किया गया था। दोषी पाए जाने के बाद निर्मला देवी को भी जेल भेज दिया गया। मालूम हो कि एक अक्तूबर 2016 को चिरूडीह खनन के रास्ते पर विधायक निर्मला देवी कफन सत्याग्रह कर रही थीं। एनटीपीसी के खनन क्षेत्र के दोनों मार्ग अवरूद्ध हो गए थे। विधि-व्यवस्था को ठीक करने के लिए निर्मला देवी को बड़कागांव कांड संख्या 226/16 मामले में गिरफ्तार किया गया। लेकिन उनके समर्थकों ने पुलिस बल पर जानलेवा हमला करते हुए उन्हें छुड़ा ले गए। जिसमें कई अधिकारी एवं पुलिसकर्मी गंभीर रूप से जख्मी हो गये थे। मामले में अभियोजन की ओर से अपर लोक अभियोजक परमानंद यादव ने गवाही कराई थी। मामले में हजारी कोर्ट में 15 गवाह एवं रांची कोर्ट में पांच गवाही दर्ज की गई थी। अदालत इसी आधार पर दोनों आरोपियों को दोषी ठहराया है। तत्कालीन एएसपी अभियान ने दर्ज कराई थी प्राथमिकी : घटना में गंभीर रूप से जख्मी एएसपी अभियान कुलदीप कुमार के बयान पर बड़कागांव थाना में कांड संख्या 228/16 के तहत दो अक्तूबर 2016 को प्राथमिकी दर्ज की गई थी। जख्मी होने के बाद उनको एयर लिफ्ट कर मेडिका रांची में भर्ती कराया गया था। मेडिका में ही घटना की पूरी जानकारी दी थी। घटना में बड़कागांव के तत्कालीन सीओ शैलेंद्र कुमार सिंह भी गंभीर रूप से जख्मी हुए थे। मेडिका में उनका इलाज चला। लेकिन स्थिति में सुधार नहीं होने के बाद उन्हें मेंदाता गुडगांव ले जाया गया था। जहां तीन दिनों तक आईसीयू में रहे। 10 अक्तूबर 2016 को अस्पताल से छूट्टी मिली थी। घटना की जांच अनुसंधान पदाधिकारी विजय शंकर ने की थी। योगेंद्र साव ने 15 अप्रैल 2019 को किया था सरेंडर : योगेंद्र साव एवं निर्मला देवी को शीर्ष अदालत ने सशर्त 15 दिसंबर 2017 को जमानत दी थी। जिसमें एक शर्त के रूप में भोपाल में रहने का निर्देश शामिल था। जहां जमानत की शर्तों का उल्लंघन किया गया। इसके बाद शीर्ष अदालत ने जमानत रद्द करते हुए चार अप्रैल 2019 को अदालत में सरेंडर करने का आदेश दिया था। आदेश पर वह रांची की निचली अदालत में 15 अप्रैल 2019 को सरेंडर किया। तब से इस मामले में जेल में हैं। बड़कागांव की घटना समेत 17 मुकदमे हजारीबाग से पहुंचा रांची : सुप्रीम कोर्ट ने जमानत रद्द करने के साथ ही हजारीबाग कोर्ट में चल रही सुनवाई के सभी मामलों को रांची कोर्ट में स्थानांतरित करने का आदेश दिया था। बड़कागांव समेत सभी 17 मामलों के केस रिकॉर्ड हजारीबाग से रांची अप्रैल 2019 को पहुंचा। मामले में सुनवाई प्रारंभ हुई। घटना में जो गंभीर रूप से जख्मी हुए : घटना में गंभीर रूप से जख्मी होनेवालों में बड़कागांव के तत्कालीन सीओ शैलेश कुमार सिंह, एएसपी कुलदीप कुमार, एसडीपीओ प्रदीप पाल, डीआरडीए निदेशक श्रीनारायण विज्ञान प्रभाकर, एएसपी के अंगरक्षक अजय कुमार प्रमाणिक, चालक किशुन कुमार साव समेत अन्य शामिल है। पुलिस की गोली से चार की मौत : घटना में पुलिस की ओर से फायरिंग की गई थी। जिसमें पवन कुमार साव, मो महताब, रंजन कुमार दास एवं अभिषेक की मौत हो गई थी। फैक्ट फाइल : घटना - चिरूडीह खनन क्षेत्र बड़कागांव तारीख - 1 अक्तूबर 2016 की सुबह छह बजे प्राथमिकी - 2 अक्तूबर 2016 नामजद - योगेंद्र साव, निर्मला देवी एवं अंकित राज चार्जशीट - 3 दिसंबर 2016 आरोप तय - 19 अप्रैल 2018 रांची कोर्ट में गवाही - 26 अप्रैल 2019 से, अभियोजन साक्ष्य बंद - 23 नवंबर 2021, अभियोजन गवाह संखाय - 20, आरोपियों का बयान - 9 दिसंबर 2021, बचाव पक्ष की गवाही बंद - 9 फरवरी 2022, दोनों पक्षों की बहस पूरी - 8 मार्च 2022, फैसला - 22 मार्च 2022, सजा का ऐलान - 24 मार्च 2022 को होगा।
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