एबीएन सेंट्रल डेस्क। दुनिया इस समय कई संकटों का सामना कर रही है। अब इस बीच भारत पर एक नया खतरा मंडरा रहा है। एक रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि भारत में जलवायु परिवर्तन की वजह से तबाही मच सकती है। संयुक्त राष्ट्र के जलवायु परिवर्तन पर इंटर गवर्मेंटल पैनल आॅन क्लाइमेट चेंज ने एक रिपोर्ट जारी की है। इस रिपोर्ट के मुताबिक, भारत को लेकर कई चिंताजनक तथ्यों का खुलासा हुआ है। रिपोर्ट में कहा गया है कि जलवायु परिवर्तन से भारत सबसे अधिक आर्थिक तौर पर प्रभावित है। इसके साथ ही सदी के आखिरी तक करीब 5 करोड़ लोग खतरे में होंगे। इस रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि मुंबई, चेन्नई और गोवा जैसे स्थानों पर तटीय इलाकों के समुद्र में डूबने का खतरा है। आईपीसीसी की रिपोर्ट में बताया गया है कि जलवायु परिवर्तन की वजह से समुद्र के जलस्तर में बढ़ोत्तरी हो रही है। आइए जानते हैं कि इस रिपोर्ट में क्या-क्या कहा गया है? तीन तरफ से भारत समुद्र से घिरा है। 7516.6 किलोमीटर भारतीय समु्द्र की लंबाई है। भारत की जनसंख्या अधिक है जिसकी वजह से समुद्र में पानी बढ़ने से भारत पर सबसे बुरा प्रभाव पड़ रहा है। भारत में साढ़े तीन करोड़ लोगों पर जलवायु परिवर्तन की वजह से हर साल तटीय बाढ़ का खतरा हो सकता है। भारी बारिश का सामना कर रहे हैं तटीय शहर : भारत के तटीय शहरों में शामिल मुंबई, चेन्नई, गोवा, विशाखापट्टनम, ओडिशा में बढ़ रहे समुद्री जलस्तर की वजह से निचले इलाकों में पानी भर जाएगा। इन शहरों में समुद्र 0.8 डिग्री गर्म हो जाएगा जिसके कारण चक्रवातों की संख्या बढ़ जाएगी। तीव्रता बढ़ने से चक्रवात बार-बार आएंगे। इन शहरों में गर्म हवाएं चल रही हैं और भारी बारिश हो रही है। इस रिपोर्ट में बताया गया है कि उन इलाकों में भारत शामिल हैं जिन्हें जलवायु परिवर्तन के कारण असहनीय परिस्थितियों का सामना करना पड़ेगा। भारत के मैदानी शहरों दिल्ली, बिहार, पटना, लखनऊ, हैदराबाद में लोगों को जलवायु परिवर्तन की वजह से असहनीय तापमान और भयानक सर्दी जैसी मौसमी स्थितियां हैं। इन राज्यों पर जलवायु परिवर्तन का खतरा : उत्तरी और भारत के कई इलाकों में सदी के आखिरी तक लोग बेहद खतरनाक वेट-बल्ब तापमान को महसूस करेंगे। अगर उत्सर्जन बढ़ता रहा है, तो लखनऊ और पटना में 35 डिग्री सेल्सियस वेट बल्ब तापमान पहुंच जाएगा जबकि भुवनेश्वर, चेन्नई, मुंबई, इंदौर और अहमदाबाद में वेट बल्ब तापमान 32-34 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है। कुल मिलाकर देखा जाए, तो असम, मेघालय, त्रिपुरा, पश्चिम बंगाल, बिहार, झारखंड, ओडिशा, छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश, हरियाणा और पंजाब पर सबसे ज्यादा प्रभाव पड़ेगा।
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