एबीएन सेंट्रल डेस्क। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग यानी की यूजीसी ने बड़ा कदम उठाया है। आयोग ने इस साल से एमफिल की डिग्री को समाप्त करने का फैसला लिया है। इसके साथ ही यूजीसी रेगुलेशन 2022 के तहत कई अन्य बड़े फैसले भी किए गए हैं। अब शिक्षकों/प्रोफेसर को रिटायरमेंट के बाद भी पेरेंट यूनिवर्सिटी में दोबारा काम करने का मौका दिया जाएगा। इसके साथ ही अनुसंधान के क्षेत्र में 70 साल की आयु तक पीएचडी की जा सकेगी। बता दें कि इससे पहले यूजीसी ने एलान किया था कि अब विश्वविद्यालयों में शिक्षण के लिए पीएचडी अनिवार्य नहीं है। यूजीसी के चेयरपर्सन प्रोफेसर एम जगदीश कुमार ने कहा था कि ऐसे कई विशेषज्ञ हैं जो पढ़ाने के इच्छुक हैं। ऐसे कई लोग हैं जिनके पास जमीनी स्तर पर कार्य का काफी अनुभव है। वर्तमान नियमों के अनुसार उन्हे पढ़ाने की इजाजत नहीं हैं। इसके लिए विशेष पदों का सृजन किया जा रहा है। समिति के गठन का फैसला : बीते गुरुवार को केंद्रीय विश्वविद्यालयों के वीसी ने यूजीसी चेयरपर्सन जगदीश कुमार के साथ हुई बैठक में शिक्षक के पदों पर नियुक्ति के जरूरी नियमों में संशोधन के लिए एक समिति के गठन का फैसला किया था। इस बैठक का आयोजन राष्ट्रीय शिक्षा नीति के क्रियान्वयन और कई अन्य जरूरी मुद्दों पर चर्चा के लिए बुलाई गई थी। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की ओर से देश में उच्च शिक्षा के मौजूदा ढांचे में बड़े बदलाव के लिए नई गाइडलाइन का मसौदा तैयार कर लिया है। इस मसौदे को जल्द अंतिम रूप दे दिया जाएगा। इसके लागू होने के बाद देश में उच्च शिक्षा का ढांचा पूरी तरह से बदल जायेगा। ये बदलाव, नई शिक्षा नीति 2020 की घोषणाओं के अनुरूप हैं।
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