एबीएन डेस्क। अखबार तो रोज पढ़ते होंगे, पर कभी ध्यान दिया है कि जब सुबह आपको न्यूजपेपर मिलता है तो सफेद दिखता है। जैसे-जैसे दिन बीतता है इसके कागज का रंग पीला पड़ने लगता है. सिर्फ अखबार ही नहीं, किताबों के साथ भी ऐसा होता है। जैसे-जैसे महीने और साल बीतते हैं, इनका भी रंग पीला पड़ने लगता है। जानिए ऐसा क्यों होता है… अर्थस्काय की रिपोर्ट के मुताबिक, कागज को लकड़ी से तैयार किया जाता है। लकड़ी में दो तरह के तत्व होते हैं : सेल्यूलोज और लिगनिन। इसलिए लकड़ी से तैयार होने वाले कागज में भी यह दोनों चीजें पाई जाती हैं। इसके असर के कारण कागज का रंग बदलता है। ऐसा होता कैसे है, अब इसे समझते हैं। कागज में मौजूद लिगनिन के कण जब हवा और सूरज की रोशनी के सम्पर्क में आते हैं तो रिएक्शन करते हैं, इसे ऑक्सीडेशन कहते हैं। इस दौरान लिगनिन के कण अधिक मात्रा में सूरज की किरणों को एब्जॉर्ब करते हैं। जितना ज्यादा ये किरणों को एब्जॉर्ब करते हैं कागज का रंग गहरा होने लगता है। रिपोर्ट के मुताबिक, यही वजह है कि घर पर मौजूद अखबार के मुकाबले खुले रखा न्यूजपेपर शाम तक पीला या भूरा नजर आता है। एक बड़ा सवाल यह भी है कि हर तरह के कागज में लकड़ी का प्रयोग होता है तो सभी कागज पीले क्यों नहीं होते? विशेषज्ञों का कहना है, कुछ दूसरी तरह के पेपर्स में इतनी तेजी से रंग नहीं बदलता। इसकी भी एक वजह है। महंगे पेपर्स के साथ ऐसा बहुत धीमी गति से होता है क्योंकि पेपर को तैयार करने के बाद इसमें से लिगनिन को बाहर निकाल दिया जाता है। इसलिए पेपर में लिगनिन न मौजूद होने पर सूरज की रोशनी के साथ रिएक्शन नहीं होती। नतीजा, वो पेपर पीला नहीं पड़ता।
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