मेदिनीनगर। वैश्विक महामारी कोरोना ने जहां पूरी दुनिया में कोहराम मचा दिया है। वहीं अब इस महामारी का सामाजिक दुष्प्रभाव दिखने लगा है। दिखे भी क्यों न। आखिर हमने इससे बचने के लिए नारा जो चुना था सामाजिक दूरी बनाने का। उसका असर भी अब दिखने लगा है। राजधानी रांची के रिम्स में तो हर रोज ऐसी खबरे सामने आ रही है कि लोग अपने परिजनों तक के लाश छोड़कर भाग जा रहे। इसे कोरोना का खौफ कहें या दूसरी लहर की भयावता, समाज से खत्म हो रही मानवता के बीच आलम यह है कि कोरोना से मौत के बाद अब उनके अपने ही अंतिम संस्कार से बच रहे हैं। कुछ ऐसा ही मामला प्रमंडलीय मुख्यालय मेदिनीनगर में भी देखने को मिला। लेकिन इंसानियत और मानवता के साथ रमजान के पवित्र महीने में चंद युवा रोजेदारों ने आगे आकर पलामू को इस कलंक से बचा लिया। कोविड से एक महिला के मौत के बाद जब उनके अंतिम संस्कार में अकेले बेटा के अलावा कोई नही पंहुचा तो पास के ही कुछ मुस्लिम युवकों ने अंतिम संस्कार में उनकी मदद की। युवकों ने मानवता की मिसाल पेश करते हुए महिला का हिन्दू रीति-रिवाज से अंतिम संस्कार किया। जानकारी के अनुसार नगर निगम क्षेत्र के कन्नीराम चौक के पास एक महिला की कोविड 19 से मौत हो गई। मृतक का बेटा सिर्फ अंतिम संस्कार के लिए हरिश्चन्द्र घाट पर लेकर पंहुचा था। मृतक के बेटे का दोस्त मोसैफ हुसैन है। उससे अपने दोस्त की तकलीफ देखी नहीं गई। फिर मुहल्ले के ही मो सैफ, सुहैल, आसिफ, शमशाद और जाफर महमूद ने दोस्त की मदद की। युवकों ने मिलकर कोविड 19 से मृत महिला का शव एंबुलेंस से उतारकर 200 मीटर दूर चिता तक पंहुचाया। रमजान के पवित्र महीने में इन मुस्लिम युवकों ने न सिर्फ साहस का परिचय दिया बल्कि भयानक महामारी के इस दौर में इस बात का भी संदेश दिया कि अभी सामाजिक दूरी नहीं बल्कि शारीरिक दूरी की जरूरत है। ऐसे वक्त में हर एक इंसान को दूसरे इंसान की जरूरत है।
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