साहित्य राजनीति को संभाल लेता है : डॉ जयंत कर शर्मा

 

टीम एबीएन, रांची। केन्द्रीय हिंदी निदेशालय नई दिल्ली और राजेंद्र विश्वविद्यालय, बलांगीर (उडीसा) के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित 8. दिवसीय नव लेखक शिविर में आज अष्टम दिवस (22.2.22) दीक्षांत समारोह का आयोजन हुआ। मुख्य अतिथि के रूप मे बोलते हुए महिला कालेज संबलपुर के पूर्व हिंदी प्रो डॉ जे के शर्मा ने कहा कि इस शिविर के आयोजन से हिन्दी नव लेखकों को प्रेरणा मिली है। साहित्य संस्कार करता है और राजनीति को दिशा-निर्देश भी प्रदान करता है। उन्होंने पं. नेहरू और दिनकर के उस प्रसंग का उल्लेख जब राष्ट्र कवि दिनकर ने पं. नेहरू को संसद की सीढ़ियों से उतरते वक्त गिरने से बचा लिया था। पं. नेहरू ने कहा दिनकर जी यदि आप नहीं होते, तो आज मैं गिर गया होता।दिनकर ने कहा कि पंडित जी राजनीति जहां गिरने लगती है, साहित्य उसको संभाल लेता है।रांची विश्वविद्यालय के पूर्व हिन्दी विभागाध्यक्ष डॉ जे बी पाण्डेय ने कहा कि हिन्दी जन-मन की गंगा है। हिन्दी भारत मां की बिंदी है।यह हमारी अस्मिता का प्रतीक है।इस शिविर से नव-लेखक प्रेरित हुए हैं और उन्हें दिशा दृष्टि मिली है यही इस शिविर की सफलता है। डॉ सीमा असीम सक्सेना ने नव लेखन की कठिनाइयों की ओर प्रतिभागियों का ध्यान आकृष्ट किया। अध्यक्षता करते हुए डा दीप्ति मंजरी मेहर ने कहा कि हिंदी हमारी राजभाषा है और हमें अपनी हिंदी पर गर्व है। इस आयोजन के लिए उन्होंने केन्द्रीय हिंदी निदेशालय का आभार व्यक्त किया। डॉ सुजाता दास और आर के महापात्रा ने भी अपने विचार व्यक्त किये। बीच में डॉ जे बी पाण्डेय निर्देशित ह और म की मुठभेड़ शीर्षक प्रहसन का प्रतिभागियों ने मंचन किया। जिसमें लाल मोहन महतो म की भूमिका में उमाशंकर महतो और गुरुजी की भूमिका में अशोक कुमार प्रमाणिक ने शानदार प्रस्तुति दी और अभिनय किया, जिसकी प्रशंसा सबो ने मुक्त कंठ से की।यह प्रहसन राष्ट्रीय एकता पर केंद्रित था। समापन समारोह में प्रशिणार्थियों ने अपने अनुभव बताए और इस शिविर की सफलता पर प्रसन्नता व्यक्त की। जिनमें अशोक कुमार प्रमाणिक, दयानंद राय, राम कुमार प्रसाद, लाल मोहन महतो, उमा शंकर महतो, अंगद प्रमाणिक, प्रियंका कुमारी, आरती कुमारी, स्वरूपा सिंह, क्षेत्र मणि बिभार डॉ नूतन सत्पथी, अभिषेक कुमार सिंह,भलटी खमारी, डॉ शिखा रानी त्रिपाठी, कुन्दन अग्रवाल, स्वरूप सिंह आदि प्रमुख हैं। डॉ शैलेश बिडालिया ने इस शिविर के स्वरूप और आवश्यकता पर प्रकाश डाला और नवांकुरों को लेखन के लिए प्रोत्साहित किया।सरस्वती वंदना सुश्री स्वरूपा सिंह ने भजन अशोक कुमार प्रमाणिक ने संचालन और आगत अतिथियों का स्वागत संयोजक डॉ संजय कुमार सिंह ने और धन्यवाद ज्ञापन श्री विनोद शर्मा जी ने किया। राष्ट्र गान से शिविर का समापन 4 बजे हुआ।

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