टीम एबीएन, रांची। चारा घोटाला मामले में राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव को सजा सुना दी गयी है। इसके साथ ही उनके सहयोगी दोषियों को भी सजा और जुर्माना लगा दिया गया है। इससे पहले वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सुबह 12 बजे सजा के बिंदु पर सुनवाई शुरू हुई। सजा के बिंदु पर सुनवाई के दौरान अधिवक्ता प्रभात कुमार ने लालू यादव की खराब सेहत का दवाला देते हुए कम से कम सजा देने का आग्रह किया है। सजा के बिंदु पर सुनवाई लालू यादव ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से जुड़कर खुद देखा, इस दौरान वो रिम्स के पेइंग वार्ड में मौजूद थे। अन्य वकीलों ने भी अपने अपने मुअक्किलों को कम से कम सजा देने का आग्रह किया। चारा घोटाला से जुड़ा पांचवां केसः 139.35 करोड़ का घोटाला- राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव से जुड़ा यह पांचवां केस है। डोरंडा ट्रेजरी से चारा खरीद के नाम पर हुए 139.35 करोड़ के अवैध निकासी मामले में 170 आरोपियों में से लालू प्रसाद, आरके राणा, ध्रुव भगत, जगदीश शर्मा सहित 99 आरोपी वर्तमान समय में ट्रायल फेस कर रहे थे। सीबीआई कोर्ट ने 15 फरवरी को डोरंडा ट्रेजरी से जुड़े केस में ट्रायल फेस कर रहे 99 अभियुक्तों में से 24 आरोपियों को जहां बरी कर दिया वहीं 34 दोषी पाये गये अभियुक्तों को तीन तीन वर्ष की सजा सुनाई। वहीं लालू यादव सहित 38 अभियुक्तों के सजा के बिंदु पर फैसला आज आया है। 15 फरवरी को सीबीआई कोर्ट से दोषी करार दिए जाने के बाद लालू सीधे रांची होटवार जेल भेजे गए, जहां से मेडिकल जांच के बार उन्हें रिम्स भेज दिया गया था। रिम्स के पेइंग वार्ड में उन्हें भर्ती कराया गया। रिम्स में डॉ विद्यापति के नेतृत्व में 7 डॉक्टरों की टीम लालू यादव के इलाज में लगी है। चौथा केस: दुमका कोषागार से 3.13 करोड़ का घोटाला- ये मामला दिसंबर 1995 से जनवरी 1996 के बीच दुमका कोषागार से 3.13 करोड़ रुपये फर्जी तरीके से निकालने का है। सीबीआई कोर्ट ने 24 मार्च 2018 को लालू प्रसाद यादव को इस मामले में अलग अलग धाराओं में 7-7 साल की सजा सुनाई थी। तीसरा केस : चाईबासा कोषागार से 33.67 करोड़ का घोटाला- चाईबासा ट्रेजरी से 1992-93 में 67 फर्जी आवंटन पत्र के आधार पर 33.67 करोड़ रुपये की अवैध निकासी की गई थी। इस मामले में 1996 में केस दर्ज हुआ था, जिसमें कुल 76 आरोपी थे। सीबीआई की स्पेशल कोर्ट ने 24 जनवरी 2018 को लालू को दोषी करार देते हुए 5 साल की सजा सुनाई। सजा के साथ-साथ 10 लाख का जुर्माना भी लगा। दूसरा केस : देवघर कोषागार से 84.5 लाख का घोटाला- देवघर ट्रेजरी से फर्जी तरीके से 84.5 लाख रुपये अवैध निकासी मामले में लालू प्रसाद को 23 दिसंबर 2017 को दोषी ठहराया गया था और 6 जनवरी को साढ़े तीन साल कैद की सजा सुनाई गई थी। साथ ही उनपर 5 लाख रुपये जुर्माना भी लगाया गया था। पहला केस : चाईबासा कोषागार से 37.7 करोड़ का घोटाला- चारा घोटाले से जुड़े चाईबासा ट्रेजरी मामले में साल 2013 में लालू प्रसाद यादव को कोर्ट ने सजा सुनाई थी। सीबीआई की स्पेशल कोर्ट ने 30 सितंबर 2013 को सभी 45 आरोपियों को दोषी ठहराया था। लालू समेत इन आरोपियों को चाईबासा ट्रेजरी से 37.70 करोड़ रुपये अवैध तरीके से निकालने का दोषी पाया गया था। इस मामले में 3 अक्टूबर 2013 को कोर्ट ने सजा सुनाई थी। लालू प्रसाद को 5 साल की सजा हुई थी। चारा घोटाला केस सुनवाई के लिए बनी थी स्पेशल कोर्ट 1996 में कांड दर्ज होने के बाद सीबीआई की विशेष अदालत इस केस की सुनवाई के लिए गठित की गई थी। रांची सिविल कोर्ट कैंपस में सेवेन (7) कोर्ट बिल्डिंग के नाम से मशहूर इस अदालत परिसर में चारा घोटाला केस की सुनवाई एक के बाद एक होती रही। डोरंडा ट्रेजरी से जुड़े मामले में अभियुक्तों और गवाहों की लंबी चौड़ी संख्या के कारण सुनवाई पूरी होने में 26 वर्ष लग गए। किन्हें कितनी मिली सजा और जुर्माना : नाम जेल जुर्माना लालू प्रसाद 5 साल 60 लाख। रवि सिन्हा 4 साल 20 लाख। मो सईद 5 साल डेढ़ करोड़। जगमोहन कक्कड़ 4 साल एक लाख। मोहिंदर एस बेदी 4 साल एक लाख। दयानंद प्रसाद कश्यप 4 साल एक करोड़। उमेश दुबे 4 साल 4 लाख बी बी सिन्हा 4 साल 1 करोड़। त्रिपुरारी मोहन प्रसाद 5 साल 2 करोड़। अजित कुमार वर्मा 4 साल 15 लाख। रवि मेहरा 4 साल 10 लाख। महेंद्र कुमार कुंदन 4 साल 15 लाख। राजेंद्र कुमार हरित 4 साल 20 लाख। जे भेंगराज 4 साल 2 लाख। जीएस प्रसाद 4 साल 11 लाख। राम प्रकाश राम 3 साल 2 लाख। जसबंत सहाय 3 साल 2 लाख। रविंद्र कुमार सिंह 4 साल 5 लाख। प्रभात कुमार सिन्हा 4 साल 3 लाख। ललितेश्वर प्रसाद यादव 4 साल 2 लाख। कृष्ण बिहारी लाल 4 साल 2 लाख। डॉ अजित कुमार 4 साल 2 लाख। सीके लाल 4 साल डेढ़ लाख। डॉ बिरसा उरांव 4 साल 3 लाख। डॉ शिव नंदन प्रसाद 4 साल 2 लाख। डॉ अर्जुन शर्मा 4 साल 2 लाख। डॉ मुकेश कुमार श्रीवास्तव 4 साल 2 लाख। डॉ बृज नंदन प्रसाद 3 साल 2 लाख। आर के राणा 5 साल 60 लाख। महेंद्र प्रसाद 4 साल 5 लाख। डीपी श्रीवास्तव 4 साल 5 लाख। बेक जूलियस 4 साल 1 लाख। कृष्ण मोहन प्रसाद 5 साल डेढ़ करोड़। राधा रमण सहाय 4 साल 6 लाख। एन एन सिंह 4 साल 2 लाख। सुरेश 4 साल ढाई लाख बालकृष्ण 4 साल 1 लाख। सत्यजीत 4 साल 15 लाख।
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