टीम एबीएन, रांची। कार्यशील पूंजी की कमी से जूझ रहे हेवी इंजीनियरिंग कॉरपोरेशन (एचईसी) को एक और संकट से गुजरना पड़ रहा है। एचईसी के अनिश्चित भविष्य के देखते हुए यहां के युवा इंजीनियर नौकरी छोड़ रहे हैं। वे दूसरे प्रतिष्ठानों में योगदान दे रहे हैं। दिसंबर-जनवरी के बीच अब तक 50 से अधिक युवा इंजीनियर एचईसी छोड़ चुके हैं। कुछ और छोड़ने वाले हैं। एचईसी में वेतन पुनरीक्षण कई सालों से लंबित है। दूसरी सुविधाएं भी बंद है। सात माह से वेतन नहीं मिलने और केंद्र सरकार के एचईसी को फिलहाल कोई वित्तीय मदद नहीं देने की घोषणा के बाद इंजीनियरों के इस्तीफा देने की रफ्तार में इजाफा हुआ है। पहले से ही इंजीनियरों और कामगारों की कमी से प्रबंधन के सामने योग्य इंजीनियरों की नियुक्ति करना चुनौती बन गई है। वित्त निदेशक ने एचईसी में अगले आदेश तक किसी भी प्रकार की नियुक्ति नहीं करने का आदेश जारी कर दिया है। इसके बाद से एचईसी में नियुक्ति बंद है। ऐसे में नए कार्यादेश मिलने के बाद डिजाइन और निर्माण में एचईसी को परेशानी हो सकती है।कर्मचारियों की कमी पूरी करने के लिए पहले से ही एचईसी कुछ सेवानिवृत्त अधिकारियों और कर्मचारियों की सेवा ले रहा है। लेकिन अब इनकी संख्या भी कम ही रह गयी है। ऐसे में प्रबंधन को एक नयी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। एचईसी में काम करने वाले कई कर्मचारियों ने बैंक से पर्सनल और दूसरे कार्य के लिए लोन लिया है। उन्हें इसकी ईएमआई एक निश्चित तिथि को देनी पड़ती है। लेकिन समय पर वेतन नहीं मिलने से वह ईएमआई जमा नहीं कर पा रहे हैं और उनका ब्याज बढ़ता जा रहा है। एचईसीकर्मियों को लेन देने का गारंटर एचईसी बना है। हर माह की दस तारीख तक वेतन भुगतान करने की शर्त पर बैंकों ने कर्मचारियों को लोन दिया है। उधर, कामगारों का कहना है कि प्रबंधन समय पर वेतन नहीं दे रहा है इस कारण ब्याज और फाइन का भुगतान भी प्रबंधन ही करे।
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