हरियाली तीज 15 अगस्त को

 

शिव-पार्वती के पावन मिलन,सुहाग और प्रकृति के श्रृंगार का अनुपम पर्व : संजय सर्राफ 

एबीएन सोशल डेस्क। विश्व हिंदू परिषद सेवा विभाग एवं श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट के प्रांतीय प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा है कि सावन मास की हरियाली, रिमझिम फुहारों और प्रकृति के मनोहारी श्रृंगार के बीच मनाया जाने वाला हरियाली तीज हिंदू धर्म का प्रमुख एवं अत्यंत लोकप्रिय पर्व है। इस  वर्ष हरियाली तीज का पर्व शनिवार 15 अगस्त को मनाया जायेगा। 

यह पर्व श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है। पंचांग के अनुसार तृतीया तिथि 14 अगस्त की शाम से प्रारंभ होकर 15 अगस्त की शाम तक रहेगी। हरियाली तीज का संबंध भगवान शिव और माता पार्वती के दिव्य मिलन से माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या की थी। 

उनकी अटूट श्रद्धा, निष्ठा और तप से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें अपनी अर्धांगिनी के रूप में स्वीकार किया। इसी पावन प्रसंग की स्मृति में हरियाली तीज का व्रत और पूजन किया जाता है। यह पर्व दांपत्य प्रेम, समर्पण, निष्ठा और पारिवारिक सुख-शांति का प्रतीक माना जाता है। हरियाली तीज विशेष रूप से सुहागिन महिलाओं के लिए महत्वपूर्ण पर्व है। 

महिलाएं पति की दीघार्यु, उत्तम स्वास्थ्य, सुख-समृद्धि और अखंड सौभाग्य की कामना से व्रत रखती हैं। वहीं अविवाहित कन्याएं मनचाहे एवं योग्य जीवनसाथी की प्राप्ति की कामना से इस व्रत को श्रद्धापूर्वक करती हैं। व्रत के अवसर पर महिलाएं भगवान शिव, माता पार्वती तथा गणेशजी की पूजा-अर्चना करती हैं। इस पर्व की सबसे सुंदर विशेषताओं में हरा रंग, मेहंदी, श्रृंगार और झूले प्रमुख हैं। 

सावन में चारों ओर फैली हरियाली के कारण इसे हरियाली तीज कहा जाता है। महिलाएं हरे रंग के परिधान, चूड़ियां और आभूषण धारण कर सोलह श्रृंगार करती हैं। हाथों में मेहंदी रचाई जाती है तथा पेड़ों पर झूले डालकर तीज के पारंपरिक गीत गाए जाते हैं। हरा रंग प्रकृति, नवजीवन, समृद्धि और नई ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है हरियाली तीज केवल धार्मिक व्रत नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, लोकपरंपरा और नारी शक्ति का उत्सव भी है। 

इस अवसर पर मायके से बेटियों को सिंधारा भेजने की परंपरा है, जिसमें वस्त्र, श्रृंगार सामग्री, मिठाइयां, मेहंदी और अन्य उपहार दिए जाते हैं। इससे पारिवारिक स्नेह और रिश्तों की मधुरता और मजबूत होती है। यह पर्व प्रकृति संरक्षण का भी संदेश देता है। सावन की हरियाली मनुष्य और प्रकृति के गहरे संबंध की याद दिलाती है। 

इसलिए हरियाली तीज के अवसर पर पौधारोपण, पर्यावरण संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों के प्रति जिम्मेदारी का संकल्प लेना पर्व की भावना को और सार्थक बनाता है। इस प्रकार हरियाली तीज भक्ति, प्रेम, दांपत्य सौहार्द, नारी सम्मान, लोकसंस्कृति और प्रकृति प्रेम का अनूठा संगम है। शिव-पार्वती के आदर्श दांपत्य से प्रेरणा लेने वाला यह पर्व भारतीय जीवन-मूल्यों को पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ाने का संदेश देता है।

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