एबीएन एडिटोरियल डेस्क (नीरज दुबे)। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा यह न्यू इंडिया है तो पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने कहा कि यह न्यू पाकिस्तान है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत को आत्मनिर्भर बनाने का अभियान छेड़ा तो इमरान खान भी अब पाकिस्तान को आत्मनिर्भर बनाना चाहते हैं। दरअसल, पाकिस्तान अपनी पहली राष्ट्रीय सुरक्षा नीति लेकर सामने आया है जिसमें भारत सहित अन्य निकटतम पड़ोसियों के साथ शांति स्थापित करने और पाकिस्तान को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने पर जोर दिया गया है। वैसे बम धमाकों और गोलीबारी के लिए आतंकवादियों को प्रशिक्षित करते रहने वाले पाकिस्तान के मुंह से शांति की बात अजीब लगती है लेकिन यह वास्तविकता है कि पाकिस्तान ने राष्ट्रीय सुरक्षा नीति में लिखित रूप में शांति पर बल दिया है। वैसे पाकिस्तान की किसी बात पर विश्वास नहीं किया जा सकता क्योंकि पूरी दुनिया गवाह है कि संयुक्त राष्ट्र तक को आतंकवाद के विरुद्ध कार्रवाई का आश्वासन देने के बावजूद कैसे पाकिस्तान आतंकवादियों का महिमामंडन करता है और उनको हर तरह की सुविधा प्रदान करता है। अब पाकिस्तान का मन शांति ढूंढ़ रहा है तो इसका कारण उसकी खराब आर्थिक हालत है। पौराणिक कथाओं के लिहाज से देखें तो आपने कई बार पढ़ा होगा कि कोई राक्षस या दैत्य किसी को अपना आहार बनाने के लिए अपना वेष बदल कर सामाजिक दिखने का प्रयास करता है लेकिन जैसे ही उसे मौका मिलता है वह अपना असली रूप दिखा देता है। यही बात पाकिस्तान के साथ भी लागू होती है। आज पाई-पाई को तरस रहा पाकिस्तान शांति की बात तो कर रहा है लेकिन जैसे ही उसका पेट भरेगा, वह अशांति मचाने पर उतारू हो जायेगा। अपनी करतूतों की सजा भुगत रहे पाकिस्तान को दुनिया के बड़े देशों ने आर्थिक मदद देना बंद कर दिया है और चीन तथा खाड़ी देशों से उसने इतना उधार ले रखा है कि वह चुकाये नहीं चुक रहा। एफएटीएफ की ग्रे लिस्ट में शामिल पाकिस्तान चाहता है कि किसी तरह प्रतिबंध हट जायें और फिर से उस पर डॉलर बरसने लगें। इसलिए पाकिस्तान के नये पैंतरे से दुनिया को सावधान रहने की जरूरत है। जहां तक पाकिस्तान की ओर से की जा रही शांति की बात है तो आपको बता दें कि इससे पहले नवाज शरीफ ने भी प्रधानमंत्री रहते हुए भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी की ओर से बढ़ाये गये दोस्ती के हाथ को थामा था। अटलजी की लाहौर यात्रा के बाद उम्मीद जगी थी कि क्षेत्र में शांति आयेगी लेकिन पाकिस्तान का असल सच यह है कि भले वहां की सरकार भारत से दोस्ती की बात सोच भी ले लेकिन पाकिस्तान के असली हुक्मरान यानि वहां की सेना भारत विरोधी रवैया कभी त्याग नहीं सकती। इसीलिए यदि पाकिस्तान सरकार भारत के साथ अच्छे रिश्तों की बात कर रही है तो समझ जाइये कि दाल में जरूर कुछ काला है। पाकिस्तान एक ओर तो कह रहा है कि वह अगले सौ साल तक भारत के साथ कोई उठापटक नहीं चाहता लेकिन सीमा पार उसने 400 आतंकवादियों को भारत में घुसपैठ के लिए तैयार रखा है। पाकिस्तान एक ओर भारत के साथ शांति चाहने की बात कह रहा है वहीं भारत के आंतरिक मुद्दों पर अनावश्यक हस्तक्षेप करने से बाज नहीं आ रहा। पाकिस्तान एक ओर भारत से अच्छे रिश्ते चाहने की बात कह रहा है तो वहीं दूसरी ओर चीन के साथ मिलकर भारत विरोधी साजिशें रचने में लगा है। पाकिस्तान अगर सौ साल तक भारत से अच्छे रिश्ते की सोच भी रहा है तो उसका एक बड़ा कारण यह भी है कि पिछले 75 सालों के दौरान वह अपनी हर बुरी हरकत के लिए हिन्दुस्तान से बुरी तरह पिटता रहा है। जहां तक पाकस्तान की पहली राष्ट्रीय सुरक्षा नीति की बात है तो आपको बता दें कि 100 पन्नों की इस रिपोर्ट में पाकिस्तान को आत्मनिर्भर बनाने पर जोर दिया गया है यानि आर्थिक सुरक्षा को मजबूत बनाने पर सबसे ज्यादा जोर है। आश्चर्यजनक रूप से इसमें सैन्य ताकत पर केंद्रित एक आयामी सुरक्षा नीति की बजाय आर्थिक सुरक्षा को केंद्र में रखा गया है। देखना होगा कि इस नीति पर पाकिस्तानी सेना की क्या प्रतिक्रिया रहती है। इमरान खान पाकिस्तान की सेना की मदद से ही प्रधानमंत्री पद तक पहुंचे हैं इसलिए अगर वह सेना के पर कतरेंगे तो उनके खिलाफ बगावत भी हो सकती है। इस रिपोर्ट को जारी करते हुए इमरान खान ने कहा भी है कि पाकिस्तान के जन्म से ही एक आयामी सुरक्षा नीति रही जिसमें सैन्य ताकत पर फोकस था, लेकिन अब इसमें बदलाव कर पहली बार राष्ट्रीय सुरक्षा को परिभाषित किया गया है। बता दें कि पाकिस्तान की राष्ट्रीय सुरक्षा नीति का वास्तविक मसौदा गोपनीय श्रेणी में बना रहेगा। इस नीति के मुख्य बिंदुओं में राष्ट्रीय सामंजस्य, आर्थिक भविष्य को सुरक्षित करना, रक्षा एवं क्षेत्रीय अखंडता, आंतरिक सुरक्षा, बदलती दुनिया में विदेश नीति और मानव सुरक्षा शामिल हैं। इसके अलावा पाकिस्तान ने देखा कि जब उसके बुरे समय में किसी ने उसकी आर्थिक मदद नहीं की तो उसने अब आर्थिक रूप से मजबूत बनने का संकल्प लिया है और इसलिए उसकी राष्ट्रीय सुरक्षा नीति में कहा गया है कि अर्थव्यवस्था मजबूत होगी तो अतिरिक्त संसाधन उत्पन्न होगे जिन्हें बाद में और सैन्य ताकत बढ़ाने और मानव सुरक्षा के लिए उपयोग में लाया जायेगा। जहां तक इस नीति में भारत से संबंधों की बात है तो मीडिया रिपोर्टों के हवाले से मिली जानकारी के मुताबिक, इसमें जम्मू-कश्मीर को द्विपक्षीय संबंध के केंद्र में रखा गया है और भारत के लिए कहा गया है कि वह सही से कार्य करें और लोगों की बेहतरी के लिए क्षेत्रीय संपर्क से जुड़ें। इस नीति में कहा गया है कि पाकिस्तान भारत सहित अपने सभी पड़ोसियों के साथ शांति चाहता है और कश्मीर मुद्दे के समाधान के बिना भी नयी दिल्ली से कारोबार के रास्ते को खुला रखना चाहता है। देखना होगा कि भारत की इस पर क्या प्रतिक्रिया रहती है। इसके अलावा भारत के संबंध में इस नीति में भ्रामक सूचना, हिंदुत्व और घरेलू राजनीतिक फायदे के लिए आक्रामकता के इस्तेमाल को हिन्दुस्तान से अहम खतरा बताया गया है। जहां तक पाकिस्तान को हिंदुत्व से डर लगने की बात है तो कमाल की बात यह है कि हिंदुओं पर अपने देश में जुल्म ढाने वाले, उनके मंदिरों को तोड़ने वाले, उनके अधिकारों को छीनने वाले और हिंदुत्व का मजाक बनाने वाले पाकिस्तान को असल में हिंदुत्व से डर लगता है। बहरहाल, जहां तक भारत और पाकिस्तान के वर्तमान संबंधों की स्थिति की बात है तो आपको याद दिला दें कि पठानकोट वायुसेना बेस पर पड़ोसी देश के आतंकवादियों द्वारा 2016 में किए गए हमले के बाद से भारत-पाकिस्तान के बीच संबंध बिगड़े थे। उसके बाद उरी में भारतीय सेना के शिविर सहित अन्य प्रतिष्ठानों पर हुए हमलों और भारत की ओर से दिये गये करारे जवाबों ने दोनों पड़ोसी देशों के बीच संबंधों को और बिगाड़ दिया।
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