अखंड एवं सशक्त भारत के स्वप्नदर्शी राजनेता...

 

एबीएन सेंट्रल डेस्क। आज हमारा देश विकसित भारत के लक्ष्य की ओर तीव्र गति से अग्रसर हो रहा है। हम प्रतिदिन उस भारत के निर्माण में निरंतर प्रयास करें जिसकी परिकल्पना डॉक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने किया था। एक ऐसा सशक्त भारत जो एकजुट हो, आत्मविश्वास से भरपूर हो तथा संवेदनशील हो।  

आज 6 जुलाई का दिन राष्ट्रवाद और नि:स्वार्थ सेवा के आदर्श में विश्वास रखने वाले करोड़ों देशवासियों के लिए बहुत ही विशेष है। आज हम डॉक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जन्म-जयंती मना रहे हैं। उनका जीवन साहस और भारत माता के प्रति अटूट समर्पण का प्रेरक उदाहरण है।  डॉक्टर साहब ने अपने व्यक्तिगत जीवन में अपने बच्चों को खोया उनकी पत्नी के निधन हो गई, परंतु राष्ट्र सेवा के प्रति संकल्प और समर्पण से वे कभी पीछे नहीं हटे।  

डॉक्टर साहब राष्ट्र की एकता एवं अखंडता के लिए दृढ़ संकल्पित थे। देश के विभाजन के समय पश्चिम बंगाल को भारत का अंग बनाए रखने में उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभायी थी। राष्ट्रीय अखंडता के लिए उन्होंने जम्मू कश्मीर के विषय पर भी संघर्ष किया और संघर्ष के क्रम में ही उनका बलिदान हुआ। दशकों बाद 2019 में कश्मीर में लागू धारा 370, 35ए हटाकर उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि दी गयी।  

राजनीतिक दृष्टि से जब पूरे देश में कांग्रेस का वर्चस्व था तब उन्होंने भारतीय जनसंघ की स्थापना का निर्णय लिया क्योंकि उनके अनुभव में आया कि एक नया विकल्प देश के लिए आवश्यक है। उन्होंने अपने दल के लिए दीया चुनाव चिन्ह का निर्णय लिया क्योंकि मात्र एक दीपक भी गहन अंधकार को मिटाने की अद्भुत शक्ति रखती है। 

स्वतंत्र भारत के पहले उद्योग मंत्री के रूप में उन्होंने दामोदर वैली कॉरपोरेशन (ऊश्उ) और सिंदरी उर्वरक से संयंत्र की स्थापना की। तत्कालीन सरकारों ने सिंदरी उर्वरक संयंत्र की भारी उपेक्षा की, लेकिन हमारी सरकार ने उसका पुनरुद्धार किया और उसे कार्यक्रम में मेरा व्यक्तिगत उपस्थिति होना मेरे लिए विशेष अवसरों में से एक था।  

जब तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू पहला संविधान संशोधन लेकर आए तब इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर सीधा प्रहार माना गया, उसे समय डॉक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी मुखर आलोचक के रूप में रहे। कांग्रेस किस हद तक जा सकती है डॉक्टर साहब समझ चुके थे और उनकी आशंका सही साबित हुई जब पहला संविधान संशोधन के द्वारा 1975 में देश में इमरजेंसी लागू कर दिया गया। 

कांग्रेस सरकार ने 42वां संविधान संशोधन अधिनियम लाकर लोकतांत्रिक मूल्यों के बुनियाद पर ही कुठाराघात किया। जब वह कोलकाता विश्वविद्यालय के सबसे युवा कुलपति बने तो उन्होंने छात्रों के बीच देश भक्ति के संदेश दिए उनका मानना था कि हमें ऐसे विद्यार्थी भी तैयार करने होंगे जो राष्ट्रहित के भाव से नेतृत्व की भूमिका निभा सके। 

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