ठंडे बस्ते में जाता महिला आरक्षण

 

  • महिला आरक्षण का ठंडा ( Freeze) हो जाना...

त्रिवेणी दास

एबीएन एडिटोरियल डेस्क। केंद्र की मोदी सरकार ने संसद का विशेष सत्र बुलाकर महिलाओं के लिए 33% आरक्षण तथा सभी राज्यों में 50% लोकसभा सीट बढ़ाने के लिए संविधान संशोधन विधेयक लाया वह मत विभाजन में विपक्ष के विरोध के कारण पारित नहीं किया जा सका। 

विपक्ष सदन में इस घटना को अपनी जीत समझ कर मेज तो थपथपा सकता है, लेकिन देश को कैसे समझ पाएगा कि आधी आबादी के लिए किए जा रहे आरक्षण को उसने आखिर क्यों रोका। दिनांक 18 अप्रैल 2026 को रात्रि 8:30 बजे देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदीजी ने राष्ट्र को संबोधित करते हुए देश की नारी शक्ति से क्षमा याचना की और आरक्षण बिल के नहीं पारित होने पर अपना दुख साझा किया। 

मोदीजी ने विधेयक नहीं पास होने के लिए कांग्रेस सपा रिमूव कांग्रेस और डीएमके को जिम्मेदार ठहराया और कहा कि देश की महिलाएं इन राजनीतिक दलों को कभी माफ नहीं करेगी। मोदीजी ने अपने संबोधन में यह भी कहा कि कांग्रेस आरंभ से ही सुधार विरोधी, लटकने और भटकाने वाली पार्टी रही है। महिला आरक्षण  का विरोध करके समाजवादी पार्टी ने लोहिया जी के सपनों को रौंद दिया है जिसे अप की महिला कभी भूल नहीं पाएगी। 

मोदीजी ने यह भी कहा कि परिवारवादी पार्टियों ने अपने भय के कारण कि यदि देश की महिलाएं सशक्त हो जाएंगी तो उनके परिवार के महिलाओं का राजनीति में प्रभुत्व समाप्त हो जाएगा, वे कभी नहीं चाहते हैं कि उनके परिवार के बाहर की कोई भी महिला राजनीति में स्थापित हो सके।

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