गुड न्यूज : इस साल भी रहेगी पीएसयू के आईपीओ की बहार

 

एबीएन बिजनेस डेस्क। सरकारी फर्मों का आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) 2018-19 में भी बड़ी संख्या में जारी रहने की उम्मीद है। बिजनेस स्टैंडर्ड को मिली जानकारी के मुताबिक सबसे पहले रेल कंपनियों आरआईटीईएस और आईआरएफसी लिमिटेड के आईपीओ मई तक आम लोगों के लिए आ सकते हैं। इसके अलावा दो और रेल पीएसयू आईआरसीओएन और आरवीएनएल के आईपीओ भी बाद में इसी साल आने वाले हैं। बहरहाल, आईआरसीटीसी का आईपीओ लाने की योजना अनिश्चितकाल के लिए टल गई है। न तो रेल मंत्रालय और न ही निवेश एवं सार्वजनिक संपत्ति प्रबंधन विभाग इसे सार्वजनिक करने के पक्ष में है। 2018-19 का संयुक्त विनिवेश लक्ष्य 800 अरब रुपये है। इस वित्त वर्ष में आने वाले अन्य आईपीओ में मजगांव डॉक शिप बिल्डर्स, गार्डेन रीच शिपबिल्डर्स के आईपीओ शामिल हैं। इनके अलावा 3 जनरल इंश्योरेंस पीएसटी का विलय कर एकल इकाई बनाई जोगी और उसके बाद उसे सूचीबद्ध कराए जाने की योजना है। इनमें नैशनल इंश्योरेंस, ओरिएंटल इंश्योरेंस और यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस शामिल हैं। दो शिपबिल्डरों का आईपीओ आगामी वित्त वर्ष की पहली छमाही में आने की उम्मीद है। वरिष्ठ सरकारी सूत्रों के मुताबिक आरआईटीईएस और आईआरएफसी की सूचीबद्धता मई के आखिर के पहले तक होगी और पहले आरआईटीईएस को सूचीबद्ध कराया जाएगा। आरआईटीईएस के आईपीओ में 12 प्रतिशत केंद्र की हिस्सेदारी हो सकती है जबकि आईआरएफसी में 10 प्रतिशत हिस्सेदारी कम की जाएगी। आरवीएनएल में 25 प्रतिशत हिस्सेदारी की योजना बनाई गई है। इसके पहले आईआरएफसी की सूचीबद्धता को लेकर संदेह था। इसकी वजह अलग कर देनदारी का मसला था। बहरहाल, कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय ने अब कंपनी को 63.92 अरब रुपये संचित विलंबित कर देयता से मुक्त कर दिया है, जिसे कंपनी के नेटवर्थ में जोड़ा जाएगा। आईआरसीटीसी के आईपीओ की योजना को ठंडे बस्ते मेंं डाले जाने की कई वजहें हैं। आईआरसीटीसी का आईपीओ न लाए जाने की वजहों के बारे में पूछे जाने पर अधिकारी ने कहा, कंपनी की आमदनी का बड़ा स्रोत टिकट की बुकिंग पर सेवा शुल्क व अन्य सेवाएं हैं। सरकार ने सेवा शुल्क वापस ले लिया है। ऐसे में निवेशकों की इसमें दिलचस्पी रहने की उम्मीद कम है। नोटबंदी की घोषणा के बाद नरेंद्र मोदी सरकार ने डिजिटल लेन-देन को लोकप्रिय बनाने के लिए कई कदमों की घोषणा की थी। इसमें से आईआरसीटीसी द्वारा लिया जाने वाला सेवा शुल्क खत्म करना शामिल था। इस कदम से आईआरसीटीसी का 500 करोड़ रुपये राजस्व खत्म हो गया। उम्मीद की जा रही थी कि वित्त मंत्रालय इस घाटे की भरपाई करेगा, लेकिन सिर्फ 800 करोड़ रुपये दिए गए। एसबीआई कैपिटल मार्केट, आईडीबीआई कैपिटल मार्केट ऐंड सिक्योरिटी, इलारा सिक्योरिटीज इंडिया और आईडीएफसी बैंक आरआईटीईएस के सलाहकार हैं, जबकि आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज, एसबीआई कैप्स, आईडीएफसी और एचएसबीसी आईआरएफसी के बोली प्रबंधक हैं। 2017-18 में कंपनियों के रिकॉर्ड 7 आईपीओ आए। इससे 240 अरब रुपये से ज्यादा एकत्र हुए, जो साल भर के पुनरीक्षित विनिवेश लक्ष्य 1 लाख करोड़ रुपये का एक चौथाई है। इन कंपनियों में न्यू इंडिया एश्योरेंस, जनरल इंश्योरेंस कॉर्प, एचएएल, भारत डायनॉमिक्स, कोचीन शिपयॉर्ड और हुडको शामिल हैं।

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