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एबीएन न्यूज नेटवर्क, पलामू। राष्ट्रीय प्रेस दिवस के अवसर पर आज स्थानीय सूचना भवन सभागार में बढ़ती भ्रामक सूचनाओं के बीच प्रेस की विश्वसनीयता का संरक्षण विषयक परिचर्चा का आयोजन किया गया। प्रमंडलीय सूचना एवं जनसंपर्क इकाई तथा सूचना एवं जनसंपर्क कार्यालय, पलामू के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित कार्यक्रम में जिले के विभिन्न मीडिया संस्थानों के पत्रकारों ने कहा कि डिजिटल युग में भ्रामक सूचनाएँ और फेक न्यूज़ तेजी से फैल रही हैं, ऐसे समय में प्रेस की जिम्मेदारी और भी बढ़ गयी है।तथ्य-जांच, विश्वसनीय स्रोत, नैतिक पत्रकारिता और संपादकीय अनुशासन ही प्रेस की विश्वसनीयता को बनाए रख सकते हैं। वरिष्ठ पत्रकारों ने यह भी बताया कि मीडिया का मूल उद्देश्य जनता को सत्य, सटीक और संतुलित जानकारी उपलब्ध कराना है।
वक्ताओं ने चर्चा के दौरान पत्रकारिता के बदलते स्वरूप, तकनीकी चुनौतियों, सोशल मीडिया के दुष्प्रभाव तथा विश्वसनीय सूचना तंत्र को मजबूत करने की रणनीतियों पर भी अपने विचार रखे।
कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन के साथ हुई। प्रमंडलीय जनसंपर्क कार्यालय के उपनिदेशक संजीव कुजूर ने सभी का स्वागत करते हुए विषय प्रवेश कराया। उन्होंने भ्रामक सूचनाओं की रोकथाम के लिए सत्यपरक जानकारियां प्रस्तुत करने की बातें कही, ताकि समाज को गति मिले।
पत्रकार प्रभात मिश्रा सुमन ने कहा कि हमसभी भ्रामक सूचनाओं के शिकार हो रहे हैं। उन्होंने उदाहरणपूर्वक बताया कि हमसभी कैसे भ्रामक सूचनाओं के आगोश में आ रहे हैं और इससे बचाव के क्या तरीके हैं। उन्होंने कहा कि विश्वसनीयता का संरक्षण पत्रकारों को खुद करना होगा। उन्होंने अप्पा दीपो भव: की बात कहते हुए खुद दीपक बनने की सलाह दी। उन्होंने काकोरी एक्शन के नायक शहीद अशफाकउल्ला खॉं के पलामू में रहने की जानकारी सहित संविधान सभा में पलामू व झारखंड के सपूतों के बारे में बृहद जानकारी देते हुए कहा कि तथ्य की प्रमाणिकता रहने से सूचनाएं भ्रामक नहीं होगी। उन्होंने सभी से प्राप्त सूचनाओं का सत्यापन करने के बाद ही प्रचारित व प्रसारित करने की सलाह दी।
राष्ट्रीय नवीन मेल के स्थानीय संपादक सह वरिष्ठ पत्रकार राणा अरुण सिंह ने कहा कि आज का विषय, बढ़ती भ्रामक सूचनाओं के बीच प्रेस की विश्वसनीयता का संरक्षण, हमारे लिए गहन आत्ममंथन का अवसर है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में इलेक्ट्रॉनिक, सोशल और डिजिटल मीडिया का समाज और देश-दुनिया पर व्यापक प्रभाव पड़ा है। यह एक ऐसा युग है जहां हर व्यक्ति सूचना का संप्रेषक बन गया है। भविष्य में यह प्रभाव वरदान बनेगा या अभिशाप, यह समय ही बताएगा। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता में विश्वसनीयता बनाए रखना आज पहले से कहीं अधिक आवश्यक है। सूचना के प्रसार में सत्यापन की जिम्मेदारी हर व्यक्ति पर है। केवल स्रोत की जांच और तथ्य की पुष्टि करने के बाद ही सूचना का प्रकाशन या प्रसारण किया जाना चाहिए। क्योंकि सूचना का प्रभाव पूरे समाज पर पड़ता है, इसलिए इसके माध्यम से समाज में विकृतियों और भ्रम की संभावना कम करने का प्रयास होना चाहिए।
उन्होंने समाज को सशक्त बनाने के लिए सही और सटीक जानकारी के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि स्रोतों को जागरूक करना आवश्यक है। भ्रमित और भ्रामक सूचनाओं की रोकथाम ही समाज में सामंजस्य और विकास की नींव रखती है। उनका संदेश था कि सही सूचना के माध्यम से ही समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाया जा सकता है और हर नागरिक अपनी जिम्मेदारी निभाकर इसे सुनिश्चित कर सकता है।
हिन्दुस्तान के पलामू ब्यूरो प्रमुख सतीश चंद्र मिश्र सुमन ने प्रेस दिवस पर आयोजित बढ़ती भ्रामक सूचनाओं के बीच प्रेस की विश्वसनीयता का संरक्षण विषय पर अपने अनुभवों को साझा किया। उन्होंने कहा कि समाज को बनाने के लिए सूचनाओं की सत्यता की जांच कर उसमें मूल्यवृद्धि कर जनता के बीच प्रस्तुत करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि पत्रकारों को पत्रकारीय गुण को जगाते हुए सही जानकारी का संप्रेषण करने की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि संप्रेषण के तीन मुख्य स्तंभों में दो यथा मिडिया और रिसिवर पूर्व की तुलना में वर्तमान में क्रमश: अध्यधिक तेज और अधिक जागरूक हो गया है। इस कारण तीसरे स्तंभ मेसेज में मिलावट आम लोग भी पकड़ ले रहे हैं। इस लिए विश्वास का संकट गहराता जा रहा है। इससे बचाव सभी स्तर पर जरूरी है तभी प्रेस की विश्वसनीयता और मर्यादा दोनों संरक्षित हो पाएगी।
द इमर्जिंग वर्ल्ड के पॉलिटिकल एडिटर संजय पांडेय ने कहा कि आज सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से सूचना प्रवाह काफी बढ़ा है। आज लोगों को /डिजिटल साक्षरता अपनानी ही पड़ेगी। ऐसे में सभी को डिजिटल अवेयरनेस की जरूरत है। पत्रकारिता में खबरों का संग्रह कर रहे पत्रकार को तथ्य जांच की अनिवार्यता को समझना है। उन्होंने कहा कि सत्य केवल खबर नहीं बल्कि विश्वास है। फेसबुक, व्हाट्सएप सहित अन्य माध्यमों द्वारा सूचना प्राप्त हो रही है। सूचनाओं को पढ़ने के साथ ही फेक सूचना की सत्यता की जांच करने की जरूरत है। तथ्य जांच के उपरांत ही प्रकाशित एवं प्रसारित करने की आवश्यकता है। उन्होंने पत्रकारों को स्वयं को अपडेट रहने की सलाह दी। साथ ही मीडिया एथिक्स एवं प्रेस लॉ की जानकारी की अनिवार्यता पर बल दिया। वहीं जमीनी स्तर पर पहुंचकर खबरों को बनाने की सलाह दी।
दैनिक जागरण के वरिष्ठ पत्रकार तौहीद रब्बानी ने कहा कि परिचर्चा की सार्थकता को हमसभी प्रेस मीडिया को आत्मसात करने और व्यवहारिक जीवन में उतारते हुए भ्रामक सूचनाओं को संप्रेषण से बचने की जरूरत है। उन्होंने जमीनी स्तर पर रिपोर्टिंग करने, प्राप्त सूचनाओं के तथ्यों की पुष्टि करते हुए पाठक/दर्शक के समक्ष सत्य समाचार प्रेसित करने पर बल दिया। पत्रकार संजय सिंह उमेश एवं प्रेम प्रकाश ने भी परिचर्चा को संबोधित किया।
कार्यक्रम का संचालन प्रेस छायाकार सैकत चट्टोपाध्याय एवं धन्यवाद ज्ञापन सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के एपीआरओ अजीत कुमार तिवारी ने की। मौके पर प्रमंडलीय जनसंपर्क इकाई के एपीआरओ बिजय कुमार ठाकुर, एसएमपीओ अमनदीप कुजूर सहित सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के सभी कर्मी एवं बड़ी संख्या में सभी प्रेस, मीडिया के प्रतिनिधिगण उपस्थित रहे।
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