एबीएन एडिटोरियल डेस्क (मनोहर रुद्र पाण्डेय)। नरेन सर, मैं अवाम को संबोधित करते हुए यह बात नहीं कह रहा, आपसे कह रहा हूं। आपके ऑफिसियल एड्रेस पर भेज भी रहा हूं। सर, बात ऐसी है कि पिछले दिनों पंजाब में आपकी सुरक्षा के साथ जो खिलवाड़ हुआ, इस पर आपसे स्नेह करने वाले हैरत में हैं। सब अपने-अपने तरीके से गुस्सा निकाल रहे हैं। इससे भी ज्यादा हैरान वे हैं, जो अपने षड्यंत्र में असफल हो गए। मैं कहता हूं। इसमें हैरान होने की क्या बात है? जो व्यक्ति सारे आतंकवादी संगठनों की हिट लिस्ट में हो, जो व्यक्ति सारे नक्सली संगठन की हिट लिस्ट में हो, जिस व्यक्ति ने सत्तर साल के खानदानी चोरों लूटमारों को कटोरा पकड़ा दिया हो, जिस व्यक्ति को किसी रूप में डिगाना सम्भव नहीं हो, उससे निजात पाने का और कोई उपाय बचता है क्या? क्या आप उस अर्बन नक्सली चिट्ठी से अनभिज्ञ हैं जिसका लिंक किसान आंदोलन से था और जिसमें कहा गया था कि मोदी को बीच सड़क पर रोककर भीड़ के नाम पर मार दिया जायेगा? सर, जो लोग लालकिला में हजारों पुलिसकर्मियों की मौजूदगी में घुसकर खालिस्तान का झंडा फहरा सकते हैं, वही भीड़ आपको चोट पहुंचा दे तो इसमें हैरानी क्या? आपने कल पंजाब में जो प्रोग्राम बनाया और मौसम खराब रहने के कारण सड़क मार्ग से जाने का त्वरित फैसला लिया, वह अतिविश्वास में लिया और गलत लिया। ऐसे समय में जोश से नहीं, होश से काम लेना चाहिए। आदमी कितना भी बड़ा बुद्धिमान हो, नैतिकता की आस में और जोश में उससे निर्णय गलत हो ही जाते हैं। आप कह सकते हैं कि खतरा कदम- कदम पर है तो क्या सारे काम रोक दूं? हां, मैं कहता हूं रोक दीजिये। खास करके गैर भाजपा की सरकार वाले प्रदेशों में रोक दीजिये। आपके गये बिना काम होता हो तो हो, अन्यथा ऐसा विकास कूड़ा है जो आपको चोट पहुंचा कर मिले। क्या आपको नहीं पता, आप जैसे व्यक्तित्व को तैयार करने में राष्ट्र को सैकड़ों साल लगे हैं? अब आपके द्वारा खतरा मोल लेने का वक्त खत्म हो गया है, लाल चौक पर जो झंडा आपने फहराया था न, पटना गांधी मैदान में जो ब्लास्ट के बीच स्पीच दिया था न, उस वक्त में और अब में बहुत अंतर आ चुका है। अब आपके द्वारा शारीरिक मौजूदगी के साथ हर जगह जाना जरूरी नहीं है, आपकी सुरक्षा ज्यादा जरूरी है, आपका हमारे बीच रहना ज्यादा जरूरी है। आज इस एक देश के भीतर कई देश हो चुके हैं। एक समय था जब आप बेधड़क पाकिस्तान में उतर गए थे, मगर वह पाकिस्तान था सर। उनमें अभी भी नैतिकता बची हुई है। ये तो भारत को लगातार खोखला करते आ रहे राजनीतिक दल और संगठन रूपी दीमक हैं। किसी भी हद तक जा सकते हैं। इन्हें हर हाल में आपको हटाना है, आपके हटे बिना इनका वजूद बचेगा नहीं। आप सोशल मीडिया पर विपक्षियों की निर्लज्जता देखिये। आप उनके षड्यंत्र से बचकर आ गए तो सैकड़ों तरह की बातें की जा रही हैं। वे इसे आपका ड्रामा कह रहे हैं। खाली कुर्सियों की हास्यास्पद बात कह रहे हैं। इसे आपकी चुनावी चाल कह रहे हैं। हो न हो, कल को रावत सर भी बचकर आ गए होते तो ये उसे भी आपकी ही कारगुज़ारी कहते, सुरक्षा में खामी नहीं। मुझे तो आज भी शक है, रावत सर की दुर्घटना के पीछे कोई षड्यंत्र है। खैर, इस समय आपके द्वारा इन षड्यंत्रकारियों को धन्यवाद देने और तंज कसने की जरूरत नहीं है। जरूरत है उन्हें बर्खास्त करने की। क्या आपके गृह मंत्रालय के पास कोई रूल नहीं है कि कल की घटना के जिम्मेवार पुलिस अधिकारियों को बर्खास्त करके जेल भेजा जाय? क्या पंजाब सरकार की इस नीचता का कोई जवाब नहीं है आपके पास? अब तो वे सजग हो गए सर। कोई दूसरा षड्यंत्र करेंगे। ये तो लगातार आपके पीछे लगे हुए हैं। महाकाल का वरदान और हम सबका स्नेह आपकी रक्षा कवच बन रहा है, मगर सवाल है कि आप इनकी ताबूत में आखिरी कील कब ठोकेंगे? क्या इनके नैतिक परिवर्तन की आस में खुद को आहूत कर लेंगे? इनमें नैतिकता बची कहां है कि ऐसे प्रकरण में लज़्ज़ा आएगी। कभी नहीं। आप सजग, सतर्क और होशियार हो जायें क्योंकि चूका हुआ दुश्मन मसल देने योग्य होता है। आपका अहित चाहनेवालों को एक मेसेज देना चाहूंगा कि हमारा मोदी कोई बड़ा पेड़ नहीं है कि गिरा दोगे और धरती हिल जायेगी। मोदी बीज है बीज, राष्ट्रप्रेम का बीज। इसे खत्म करने की सोचो भी मत, क्योंकि जो अंकुरण हो गया है, वह फलेगा ही। अपने वजूद की सोचो, तुम्हारी उस धरती की सोचो जो बंजर हो रही है। "मृत्युंजय नरेन सर" के चिरायु होने की कामना के साथ वंदे मातरम...
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