टीम एबीएन, तमाड़। रांची-टाटा मार्ग के तमाड़ स्थित देवड़ी मन्दिर आज किसी पहचान का मोहताज नहीं है। अब यहां एक से बढ़कर एक लोग आते हैं। इस मंदिर के निर्माण के बारे में कहा जाता है कि ये 10वीं से 12वीं शताब्दी के बीच का है। मंदिर बनते किसी ने नहीं देखा। पुजारी बताते हैं कि एक भक्त को मंदिर की उपस्थिति के बारे में स्वप्न आया था। जब ढूंढ़ा तो जंगल की झाड़ियों के बीच देवड़ी माता का मंदिर मिला। हालांकि मंदिर के निर्माण के बारे में एक कथा ये भी है कि सिंहभूम के मुंडा राजा केरा ने इसकी स्थापना युद्ध में परास्त होकर लौटते समय की थी। कहते हैं कि देवी ने सपने में आकर राजा को मंदिर स्थापना करने का आदेश दिया था, जिसके बाद राजा केरा को उनका राज्य दोबारा प्राप्त हो गया था। इस मंदिर के दरवाजे भी पत्थर के बने हुए हैं। मंदिर में करीब तीन से साढ़े तीन फीट ऊंची देवड़ी वाली मां दुर्गा की मूर्ति स्थापित है। आपने मंदिरों में 8 या 10 भुजाओं वाली दुर्गा माता देखी होंगी लेकिन इस मंदिर में विराजित हैं 16 भुजाओं वाली मां दुर्गा। ये माता सिंहवाहिनी मां दुर्गा का ही स्वरूप हैं।
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