टीम एबीएन, गया। गया में कोरोना के मामले लगातार तेजी से बढ़ रहे हैं। ऐसी स्थिति के बीच गयाधाम में भारी संख्या में पिंडदानी बगैर मास्क और सोशल डिस्टेंस के बीच पिंडदान कर रहे हैं। तीर्थयात्रियों के साथ कुछ ब्राह्मण भी बिना मास्क के ही पिंडदान करवा रहे हैं। गुरुवार की दोपहर फल्गु नदी में सर्द पछुआ के बीच कई जत्था बालू पर बैठकर पितरों के लिए कर्मकांड करते नजर आए। देवघाट से नीचे उतर केर दायीं ओर उत्तर प्रदेश के हरदोई, लखीमपुर आदि स्थानों के पिंडदानी जत्थे में पिंडदान करते मिले। सभी बिना मास्क और बिना दूरी के आराम से बैठे। पिंडदान कर रहे तीर्थयात्री बहादुर सिंह और सतीश चंद ने बताया कि वे तीन दिनी पिंडदान के लिए आए हैं। गया के बाद गंगा दशहरा में शामिल होने के लिए जाएंगे। इस जत्था से थोड़ा आगे मध्य प्रदेश के देवास का लंबा जत्था भी बिना मास्क के बैठे मिले। आचार्य राम अवधेश पांडेय भी बिना मास्क के। जत्थे की हेड इंद्रेन टोपो ने बताया कि गया के बाद बंगाल (गंगा दशहरा) जाना है। उसके बाद जगन्नाथपुरी, तिरूपति, कन्या कुमारी आदि तीर्थस्थल होते हुए देवास लौट जाना है। इसी वक्त गुजरात का भी जत्था पिडदान करते मिला। मालूम हो कि पौष पितृपक्ष (मिनी पितृपक्ष) को लेकर गयाधाम में कई प्रदेशों के पिंडदानी आए हुए हैं। अधिकतर पितरों के लिए कर्मकांड के बाद गंगा दशहरा मेला जाएंगे। कोरोना की सख्ती से पहले 20 जनवरी तक पिंडदानियों की आवाजाही लगी रहती है। लेकिन, अब विष्णुपद मंदिर के बंद हो जाने से पिंडदानियों के आने की उम्मीद नहीं है।
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