देवेंद्रनाथ महतो ने अतिक्रमणमुक्त करायी 281 एकड़ जमीन

 

देवेंद्रनाथ महतो ने हल चलाकर बीआइटी संस्थान द्वारा अवैध रूप से 281 एकड़ कब्जा जमीन को मुक्त कराया 

अवैध कब्जा जमीन को मुक्त कराने हेतु जमीन बचाओ राज्यव्यापी आंदोलन किया जायेगा : देवेंद्र नाथ महतो 

टीम एबीएन, रांची। इन दिनों राज्य में अवैध जमीन कब्जा का विवाद मामला सबसे ज्यादा लंबित चल रहा है। बीआईटी बिरला प्रौद्योगिकी संस्थान मेसरा में अवैध जमीन कब्जा मुक्त कराने हेतु आज हेलीपेड मैदान मेसरा आंदोलन हुआ। यह आंदोलन रैयत विस्थापित संघ के बैनर तले हुआ। आंदोलन में विभिन्न राजनीतिक व सामाजिक संगठन के अगुवा पहुंचे। संबोधन में  झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा के वरीय उपाध्यक्ष देवेंद्रनाथ महतो ने संबोधन में कहा कि आज हमलोग अवैध कब्जा जमीन को मुक्त कराने के उद्देश्य एकजुट हुए हैं। 

जमीन को बीआईटी के अवैध कब्जा से मुक्त कराना है तो आज अभी तत्काल हल चलाना होगा खेती कार्य प्रारंभ करना होगा। उपस्थित सभी नेता और जनता ताली गड़ गड़गड़ाहट से हामी भरी, तत्काल पांच ट्रैक्टर मंगाया गया। देवेन्द्र नाथ महतो खुद ट्रैक्टर का हल चलाकर जमीन जोता गया। जिसका  उद्घाटन कांके विधायक सुरेश बैठा हरी झंडी दिखाकर किया। 

विधिवत सांस्कृतिक गीत संगीत के साथ धान और मड़ुवा अनाज का बुवाई कर जमीन बचाओ का मुहीम चलाया गया। आज के आंदोलन में पूर्वी मेसरा, पश्चिमी मेसरा, कैदल, नेवरी और चुटु पंचायत के हजारों लोग जुटे। स्थिति नियंत्रण पर स्थानीय थाना प्रभारी संजीव कुमार पहुंचे। बताते चलें कि मेसरा, रुदिया, होंबई, पंचोली और नया टोली मौजा के मुल रैयतों के कुल 281 एकड़ के जमीन घेराबंदी का प्रशासनिक नोटिस जारी किया गया था। जिसका आज पुरजोर तरीके से विरोध किया गया। 

आज के आंदोलन में पूर्व रांची लोकसभा सांसद रामटहल चौधरी, पूर्व शिक्षा मंत्री गीताश्री उरांव, कांके विधायक सुरेश बेठा, जीतू चरण राम, कमलैश राम, कुशल मुंडा, करमु मुंडा, विजय केसरी, नागेंद्र महतो, बाबूलाल महतो, फुलेश्वर बेठा आदि विस्थापित संघ के लोग रहे। बताते चलें कि कल शुक्रवार को इस जमीन विवाद समाधान को लेकर प्रशासनिक पदाधिकारी के मौजूदगी में संस्थान प्रबंधन और रैयतों का वार्ता असफल रहा। 

देवेंद्र नाथ महतो ने मीडिया वार्ता में कहा कि इतिहास में पहली बार जमीन विवाद आंदोलन से अवैध कब्जा जमीन को हल चलाकर खेती कार्य कर मुक्त कराया गया। जमीन लुट को हमारा पूर्वज कभी स्वीकार नहीं किया है, जमीन बचाने का संघर्ष का इतिहास पुराना है, जमीन बचाने को लेकर हमारे पूर्वज ढाल विद्रोह, चुआड़ विद्रोह, घोटवाल विद्रोह, भोक्ता विद्रोह, मुंडा विद्रोह, संथाल विद्रोह  ऐसे अनेक विद्रोह का इतिहास रहा है। साथ ही उन्होंने कहा कि हम शिक्षा का समर्थन करते हैं लेकिन संस्थान द्वारा जबरन अवैध रूप से रैयतों और फॉरेस्ट जमीन अधिग्रहण स्वीकार नहीं किया जायेगा।

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