टीम एबीएन, रांची। HEC (हैवी इंजीनियरिंग कॉरपोरेशन) में कार्यरत सप्लाई कर्मियों का आंदोलन शुक्रवार को 11वें दिन भी पूरे जोर-शोर से जारी रहा। आंदोलनकारी सप्लाईकर्मी नेहरू पार्क से जुलूस की शक्ल में निकले और HEC मुख्यालय पहुंचकर वहां जबरदस्त प्रदर्शन और सभा की। कर्मचारियों की भीड़ इतनी अधिक थी कि मुख्यालय के सामने सड़क पर जाम जैसे हालात बन गये। नारों, पोस्टरों और लाल झंडों के बीच मजदूरों का गुस्सा साफ नजर आया।
सभा को संबोधित करते हुए कई वक्ताओं ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि अगर अभी भी कर्मचारी एकजुट नहीं हुए तो आने वाले दिनों में उनका भविष्य पूरी तरह अंधकारमय हो सकता है। वक्ताओं ने मेकॉन का उदाहरण देते हुए कहा कि जिस तरह वहां आउटसोर्सिंग एजेंसियों ने सप्लाई कर्मियों को अचानक काम पर आने से रोक दिया, वही स्थिति जल्द एचईसी में भी हो सकती है।
कर्मचारियों का आरोप है कि प्रबंधन उनके साथ लगातार धोखा कर रहा है। पांच महीने तक ईएसआई की राशि जमा नहीं की गयी और जब सवाल किया गया तो कहा गया कि काम ही नहीं हुआ। ऐसे प्रबंधन पर कैसे विश्वास किया जाए?
वक्ताओं ने कहा कि सप्लाई कर्मियों को मिलने वाली रविवार की छुट्टी, अर्जित अवकाश (AL), आकस्मिक अवकाश (EL), महंगाई भत्ता और क्वार्टर की सुविधा पहले से हुए समझौतों के तहत दी जाती है। अगर प्रबंधन इन्हें छीनने की कोशिश करेगा तो मजदूर कानूनी लड़ाई में उतरेंगे।
सभा में यह भी कहा गया कि यह आंदोलन केवल वेतन या सुविधा का नहीं, सम्मान और अधिकार का आंदोलन है। वक्ताओं ने जोर देकर कहा कि जो भी अधिकार कर्मचारियों को मिले हैं, वे संघर्ष और लामबंदी से ही मिले हैं, न कि किसी दया से।
वक्ताओं ने झारखंड सरकार के श्रम मंत्री का भी हवाला दिया, जिन्होंने हाल ही में स्पष्ट कहा था कि एचईसी के ठेका मजदूरों की सुविधाएं छीनी नहीं जाएंगी। मंत्री के बयान के बावजूद प्रबंधन के रवैये में कोई बदलाव नहीं आया है, जिससे स्थिति और तनावपूर्ण हो रही है।
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