टीम एबीएन, रांची। इस्लामिक कैलेंडर प्रथम महीने मोहर्रम को आज राजधानी रांची में भव्य तरीके से मनाया गया। झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा ने महीने के आज 10वें दिन आसुरा मनाया। ढोल ताशो की गूंज, ताजिया की सजावट के साथ हुसैन या हुसैन के नारे करबला में गूंज उठा। वातावरण भावुक और श्रद्धामय हो गया। इमामबाड़ा में मुस्लिम समुदाय के लोग एकत्रित होकर इमाम हुसैन की बलिदान को याद किया।
राजधानी के डोरंडा, हिंदपीडी, कडरू, मोरहाबादी आदि क्षेत्रों से कई विशाल जुलूस निकाला गया और कर्बला चौक में इमाम हुसैन के मकबरा का प्रतीक ताजिया एवं विभिन्न रंग-बिरंगे पताका लेकर एकत्रित हुआ। जिससे भारी भीड़ देखने को मिला। प्रशासन ने कड़ी मुस्तैदी के साथ विधि व्यवस्था नियंत्रण पर लगे रहे। हज़रत इमाम हुसैन और उनके 72 साथियों के बलिदान को याद किया गया।
जेएलकेएम संगठन के बैनर से मेंन रोड (महात्मा गांधी मुख्य मार्ग) टैक्सी स्टैंड में भव्य स्टेज सज़ाया गया। स्मृति शोक-संगीत गाया गया। मुख्य अतिथि संगठन के केंद्रीय वरीय उपाध्यक्ष देवेंद्रनाथ महतो शामिल होकर विभिन्न जुलूस के खलीफा को पगडी पहनाकर सम्मानित किया गया। बेहतर करतब दिखाने वाले को मोमेंटो से प्रोत्साहित किया।
शहीदों को याद करते हुए श्री महतो ने कहा कि हमारा यह मुहर्रम खुशियों और जश्न का नहीं बल्कि शोक और मातम का का त्यौहार है। त्याग बलिदान और एकता का मिशाल है। पैगंबर मोहम्मद साहब के नवासे हजरत इमाम हुसैन ने अन्याय, असत्य और अधर्म के खिलाफ अपना साहस दिखाया था। उनके 72 सहयोगियों ने अन्याय के खिलाफ अपना बलिदान स्वीकार था।
आज के इस इस्लामी पवित्र कार्यक्रम में संगठन के अल्पसंख्यक केंद्रीय अध्यक्ष आजाद हुसैन अंसारी, नवसाद आलम,अयुब अली, इरसाद आलम, अजरुद्दीन आलम, मूदस्सिर नवाज, मोहसिन अंसारी, शाहीद अंसारी, संजय महतो आदि संगठन के पदाधिकारी मौजूद होकर कार्यक्रम को सफल बनाया।
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