टीम एबीएन, रांची। रांची पहाड़ी और उस पर स्थित आस्था के प्रमुख केंद्र पहाड़ी मंदिर (शिवालय) पर ध्यान देने की जरूरत है। यह पहाड़ी अब किसी भी तरह के नये निर्माण कार्य को बर्दाश्त नहीं कर पायेगी। ये हम नहीं,बल्कि सरकार की ओर से गठित उस तकनीकी दल ने कहा है, जो कुछ दिन पहले रांची पहाड़ी और उस स्थापित महादेव के मंदिर की भौतिक जांच करने पहुंची थी।
तकनीकी दल के एक सदस्य ने बताया कि रांची पहाड़ी संकट में है। उनके दल ने मौका-मुआयना करने के बाद यह भी स्पष्ट कर दिया है कि अब पहाड़ी और इस पर स्थित मंदिर में निर्माण से संबंधित कोई गतिविधि नहीं होनी चाहिए। क्योंकि, पहाड़ी की मिट्टी ढीली हो गयी है। दल के सदस्य ने बताया कि फिलहाल वस्तुस्थिति का अध्ययन किया जा रहा है। टीम छह माह में अपनी रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंप देगी।
पहाड़ी मंदिर इन दिनों नयी समस्या से जूझ रहा है। यहां दिन-ब-दिन चूहों की तादाद बढ़ रही है, जो मंदिर की दीवारों, फर्श और नींव में सुरंगें बनाकर इसे अंदर से खोखला कर रहे हैं। चूहों ने मंदिर परिसर में लगे पेड़ों की जड़ों को भी खोखला कर दिया है।
समय रहते उपाय नहीं किया गया, तो मंदिर को भारी नुकसान हो सकता है। सुरंग की वजह से मंदिर परिसर में कई जगहों पर फर्श धंस गयी है। जिस जगह जमीन खोखली हो गयी है, उसे टाइल्स के जरिये ढंकने की कोशिश की जा रही है।
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