एबीएन सोशल डेस्क। द्वितीय सुपुत्र परिवार आवासीय तपोवन में उसके वैवाहिक जीवन के पांचवें वर्षगांठ पर एक इच्छा के अनुसार पुत्र विपुल व पुत्रवधु स्वेच्छारानी की शुभेच्छा और अपनी सहमति से खुशी-खुशी पूजा एवं श्रीसत्यनारायण व्रत कथा व हवन-यज्ञ की विधि विधान किया गया।
इस दौरान व्यवस्था बनाकर परमपूज्य गुरुदेव श्रीप्रज्ञावतार की शानदार लेखनी व दिशा-निर्देश अनुसार श्रीगुरु-ईश वंदना, देव पूजन, स्वस्तिवाचन, रक्षा विधान पाठ एवं विवाह दिवसोत्सव संस्कार के सूत्र, संकल्प धारण, विधान सहित यज्ञीय विधान किये गये।
इसके पूर्व श्रीमद्भागवत श्रीसत्यनारायण व्रत-कथा के सभी पांचों अध्याय सुनाये गये अध्याय पाठ में उसके विशेष धर्म, मर्म, तर्क, अर्थ, भावार्थ व व्याख्याात्मक तथ्यों पर उन सबके विशेष ध्यान आकर्षित कर आवश्यक सूत्रों पर गहराई से चर्चा की गयी।
साथ ही उपस्थित उक्त श्रोताओं को विशेष तौर पर आज के अद्यतन लौकिक, धार्मिक, आध्यात्मिक, पारिवारिक, सामाजिक, सांसारिक सामयिक परिस्थितियों की तुलनात्मक स्तर पर अध्ययन, विश्लेषण, निगरानी सावधानी बरतने के उपायों सूत्रों को सुनाये गये।
आगे विचार-विमर्श करते हुए उनके संगी साथी मित्र मंडली के बीच इस महान युगस्रष्टा, युग प्रवर्तक की नव युग साहित्य और नवयुग के सृजेता की महत्वपूर्ण लेखनी एवं भविष्य में मानवीय मूल्यों के नैतिक चारीत्रिक गंभीर तथ्यों के आधार-भूत कथा प्रसंग में आने वाले ब्राह्मण की ब्रह्म विद्या, राजा की राज्य व्यवस्था, शासन प्रणाली, नीति अनीतिपूर्वक व्यवसाय व्यवहार, छोटे वर्ग समझे जानै वाले प्रजाजनों की धर्म भक्ति, ईश्वरीय आस्था, धार्मिक श्रद्धा में मूल्यवान, सराहनीय, अनुकरणीय अनुसरणीय बातों, तथ्यों व सूत्रों की चर्चा करते हुए चारों वर्णों, वर्गों की वास्तविक धर्म-निष्ठा, कर्तव्य- परायणता और आस्तिकता, धार्मिकता और आध्यात्मिकता की तुलनात्मक तथ्यों के प्रति सकारात्मक सोच विचार और उसके प्रयास परिणाम पर प्रकाश डालते हुए विशेष यादगार बनाने तथा औरों को बताने की आज की महती आवश्यकता पर भी सलाह सुझाव पेश किये गये।
गुरुवर श्रीपूज्यवर की विशिष्ट लेखनी अनुसार व्रतकथा के पांचों पाठ-अध्याय की विशिष्ट खूबियों की मंगलमय चर्चा की गयी। उसे सुनकर वे लोग भी आनन्दित प्रफुल्लित होकर स्वीकार किया और बताया कि ऐसी कथा प्रसंग व चर्चा परिचर्चा अभी तक नहीं सुनी गई है। विषयगत प्रसंग व उद्देश्य पर बताया।
अखिल विश्व गायत्री परिवार युगतीर्थ शान्तिकुञ्ज तत्वावधान में रांची मुख्य शक्तिपीठ की शाखा से संबंधित परिवार साधक के प्रवास काल में उक्त कार्यक्रम में श्रीसत्यनारायण व्रत कथामृत श्रवण हुआ, यज्ञीय अनुष्ठान विधान हुए। इस आधार पर कथावाचन में साधक ने अपनी संस्थान इकाई ओर से लिखित इस पुस्तक स्वाध्याय के आधार की भूमिका पर कथा सुनायी।
बताया कि समाज में चार शक्तियां प्रधान रूप से सक्रिय रहती हैं- १. ज्ञान, २. बल, ३. धन एवं ४. श्रम। इन सभी शक्तियों का विकास और सदुपयोग समाज की सुव्यवस्था के लिए आवश्यक है। इन्हीं शक्तियों से संपन्न व्यक्तियों को क्रमश: १. ब्राह्मण, २. क्षत्रिय, ३. वैश्य एवं ४. शूद्र कहा जाता था। इन शक्तियों को सत्य-परायण बनाकर कैसे सुख-समृद्धि पाई जाए, यह मार्गदर्शन सत्य-व्रत कथा से मिलता है।
इस दृष्टि से सत्यनारायण व्रत कथा बहुत लोकोपयोगी है। लोकप्रिय कथा को लोकोपयोगी ढंग से प्रस्तुत किया जा सके, तो समाज का उल्लेखनीय लाभ हो सकता है। लोग सत्य-व्रत का सही रूप सत्यनारायण कथा के माध्यम से समझ लें, तो सच्चे अर्थों में आस्तिक बनें और सुख समृद्धि के अधिकारी बन सकते हैं।
परमपूज्य गुरुदेव श्रीप्रज्ञावतार का कहना है, उनका दिशानिर्देश है इसके लिए प्रथम कथावाचकों को अपने गम्भीर उत्तरदायित्व को समझना और पालन करना होगा। बताया कि युग निर्माण परिवार के सक्रिय श्रद्धावान साधक, कर्मठ पाठक, कथावाचक परिजन कथाओं द्वारा लोक शिक्षण के अपने अभियान अंतर्गत इस बहुमूल्य उद्देश्य की पूर्ति भी कर रहे हैं।
साथ ही जहां ये प्रोग्राम प्रयोग हो रहे हैं, वहां आशातीत सफलताएं भी मिल रहीं हैं। इस पर कहीं एक दिवसीय भी और कहीं 5 दिवसीय अनुष्ठान भी सफलतापूर्वक संपन्न हुए। उक्त जानकारी गायत्री परिवार के वरिष्ठ साधक जय नारायण प्रसाद ने दी।
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