समस्या समाधान शीघ्र करें, नहीं तो अतिशीघ्र जमीन बचाओ यात्रा निकलेगी : देवेन्द्र नाथ महतो

 

  • रांची में जबरन जमीन कब्जा मामला को लेकर देवेन्द्र नाथ महतो ने राज्यपाल से की मुलाकात

टीम एबीएन, रांची। राजधानी में जबरन जमीन कब्जा का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। रांची में तेजी से हो रहे अवैध जबरन जमीन कब्जा का मामला को जेएलकेएम केंद्रीय वरीय उपाध्यक्ष देवेन्द्र नाथ महतो समेत नौ सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल महामहिम राज्यपाल संतोष गंगवार तक पहुंचाया।

मौके पर देवेंद्र नाथ महतो ने बताया कि महामहिम राज्यपाल संतोष गंगवार जी को ध्यान आकृष्ट कराया गया कि रांची में पूंजीपति वर्ग द्वारा लगातार जबरन सीएनटी एक्ट जमीन, गैर मजरूआ आम खास, कृषि भूमि, वन भूमि, पहनाई, कायमी, सिकमि, बकास्त, जिरात, बकाश्त भूइहरी, हिंद केसरी, इत्यादि प्रकार के जमीन को सीएनटी एक्ट, भूमि अधिग्रहण अधिनियम का उलंघन करते हुए अवैध रूप से जबरन कब्जा किया जा रहा है।

बिरला प्रौद्योगिकी संस्थान मेसरा द्वारा मेसरा, रुदिया, हुंबई, मौजा का 281 एकड़ जमीन बिना अधिग्रहण दस्तावेज के जबरन कब्जा किया जा रहा है, मेसरा के अनुसार 1964-65 में भूमि अधिग्रहण किया जा चुका है लेकिन उक्त जमीन का बीआईटी मेसरा और भू-अर्जन विभाग, जिला भू-अभिलेखागार के पास जमीन अधिग्रहीत का कोई भी दस्तावेज उपलब्ध नहीं है जबकि उक्त जमीन का रैयत वर्तमान समय 2024-25 में जमीन का लगान भर रहे हैं। 

कांके नगड़ी मौजा में रिम्स टू के नाम से 277 एकड़ खतियानी, कटवार, पहनाई, कायमी इत्यादि प्रकार का जमीन को बिरसा एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी द्वारा 1956-57 में अधिग्रहीत का नाम से जबरन कब्जा किया जा रहा है, जबकि 1956-57 से लेकर 2012 तक स्थानीय रैयत द्वारा जमीन का लगान भी भरा जा चुका। 

इसी जगह पर स्थानीय रैयत द्वारा जब 2012 ई में आईआईएम/ ट्रिपल आईटी कॉलेज निर्माण का विरोध किया गया तब से कांके नगड़ी मौजा के समस्त जमीन का लगान वसूली कार्य बंद कर दिया गया था। उक्त जमीन का रैयत द्वारा 2012 तक नियमित रूप से लगान भरा है जबकि बिरसा एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी और जिला भू-अर्जन कार्यालय, जिला भू-अभिलेखागार कार्यालय कहीं भी जमीन अधिग्रहीत का कोई भी प्रमाण दस्तावेज उपलब्ध नहीं है।

टाटीसिल्वे हरातु मौजा में डीआरएम दक्षिण पूर्वी मंडल रेल  द्वारा अवैध रूप 78.39 एकड़ जमीन जबरन कब्जा किया जा रहा है, आरटीआई के जवाब में रेलवे के पास जमीन अधिग्रहीत का कोई भी दस्तावेज उपलब्ध नहीं है भू-अर्जन कार्यालय में संपर्क करने का लिखित जवाब दिया था, भू-अर्जन विभाग के अनुसार लगभग 7 एकड़ जमीन अधिग्रहण करने करने का दस्तावेज है लेकिन रेलवे इंजिनियरिंग नक्शा के अनुसार 1957-58 में 38.74 एकड़ जमीन अधिग्रहण का दावा ठोकती है लेकिन ग्रामीणों का शिकायत है कि वर्तमान में जमीन का मापी करने से 77 एकड़ जमीन पर अवैध जबरन कब्जा करने का शिकायत है।

साथ ही उन्होंने यह भी जानकारी दी कि कांके चामा, बुकरु, नगड़ी मौजा में 500 एकड़ से ज्यादा बखास्त, मुंडा, भुईहरि, पहनाई, डाली कतारी जमीन का नेचर को बदल कर बड़े बड़े भू माफिया जमीन को जबरन अवैध रूप से बेचा जा रहा है।
मौके पर देवेन्द्र नाथ महतो ने बताया कि पूंजीपति वर्ग, भू - माफिया और सरकारी अधिकारीयों के मिलीभगत द्वारा साजिश के तहत राजधानी रांची आसपास के किसानों को भूमिहीन बनाने का षडयंत्र रचा जा रहा है।

 सीएनटी एक्ट की धारा 49 और भूमि अधिग्रहण अधिनियम 2013  की धारा 101 के अनुसार अगर सरकार द्वारा जमीन किसी जमीन को अधिग्रहीत करने के पांच साल तक उक्त जमीन पर निर्माण कार्य प्रारंभ नहीं किया जाता है तो वह जमीन रैयत को वापस करने का प्रावधान है फिर भी रैयत का जमीन को जबरन कब्जा किया जा रहा है।

नियम के अनुसार जमीन का समस्या का समाधान किया जाय अन्यथा राजधानी रांची चारों तरफ से जमीन बचाओ यात्रा आंदोलन किया जायेगा। राज्यपाल से मुलाकाती में देवेन्द्र नाथ महतो समेत नौ प्रतिनिधिमंडल में करमु मुंडा, नागेंद्र महतो, बाबूलाल महतो, जयंती देवी, संजय महतो, मालती देवी, चंदन महतो, धनेश्वर महतो, रजनीश कुमार महतो, शांति देवी शामिल थे।

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