टीम एबीएन, रांची। वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग, झारखंड सरकार के वन प्रचार, प्रसार प्रभाग, रांची द्वारा आज दिनांक 5 जून 2025 को पलाश कॉन्फरेंस हॉल, डोरंडा में विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर एक भव्य समारोह का आयोजन किया गया। इस वर्ष वन विभाग की थीम आओ वन बंधू बने। जिसका अर्थ था। प्रकृति के साथ दोस्ती कर पर्यावरण की रक्षा करना, जिसके अंतर्गत विभाग द्वारा पिछले कई महीनों से विभिन्न स्कूलों एवं कॉलेजों में जागरूकता कार्यक्रम, वृक्षारोपण अभियान एवं स्वच्छता गतिविधियाँ आयोजित की जा रही है।
कार्यक्रम की शुरुआत पीसीसीएफ डेवलपमेंट वाईके दास, डीएफओ पब्लिसिटी श्रीकांत वर्मा, अशोक कुमार-पीसीसीएफ एवं एचवोएफएफ, शशिकार सामंता- पीसीसीएफ वाइल्डलाइफ एवं सीडब्लूएलडब्लू, शैलजा सिंह-चेयरपर्सन बायोडायवर्सिटी बोर्ड, परितोष उपाध्याय- पीसीसीएफ एडमिन, संजीव कुमार-एमएस झारखंड बायोडायवर्सिटी बोर्ड, रवि रंजन-एपीसीसीएफ, कैंपा, यतीन्द्र कुमार दास- एपीसीसीएफ, डेवलपमेंट, विनयकांत मिश्रा- आईएफएस एवं अन्य विभागीय माननीय अतिथि ने दीप प्रज्वलन के साथ किया।
इसके तुरंत बाद सभी अतिथियों ने पौधरोपण किया गया। अतिथियों का स्वागत डीएफओ पब्लिसिटी श्री श्रीकांत वर्मा द्वारा किया गया। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि, पर्यावरण की रक्षा केवल एक दिन की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि यह एक निरंतर प्रयास है जो आने वाली पीढ़ियों के लिए हमारी धरोहर को सुरक्षित रखता है।
इसके बाद धरित्री कला केंद्र, रांची द्वारा पर्यारण को ध्यान में रखते हुए उनके दो ग्रुप ने नृत्य प्रस्तुत किया। जिसमें छोटे बच्चों के ग्रुप ने प्लास्टिक के इस्तमाल एवं इसके नुकसान से बचने एवं प्लास्टिक के यूज पर रोक लगाने की मुहीम पे बने थीम सांग पर नृत्य किया। इनके इस नृत्य ने सभागार में मौजूद सभी का दिल जीत लिया। इस अवसर पर सभागार में मौजूद लगभग 150 से अधिक लोगों ने संकल्प लिया की वो ऐसे सभी चीजों का बहिष्कार करेंगे जिससे हमारे धरती को नुकसान पहुंच रहा है।
इस अवसर पर विभिन्न स्कूलों एवं कॉलेजों के छात्रों द्वारा फैंसी ड्रेस, पोयम रेसिटेशन एवं एस्से प्रतियोगिता में भाग लिया। सभी प्रतियोगिताओं के माध्यम से छात्रों ने पर्यावरण को सुरक्षित रखने , धरती को हरा भरा एवं अधिक सुन्दर बनाने की अपने मंतव्य को जाहिर किया। इसके अलावा सभी छात्रों को जागरूकता सामग्री दी गयी। विशेषज्ञों ने वनों की वर्तमान स्थिति, संकट और समाधान पर व्याख्यान भी दिया गया। इसके अलावा विजेताओं को पुरुस्कारों से सम्मानित किया गया। सभी प्रतिभागियों को प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए मेडल भी दिया गया।
कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण बच्चों का विचार, उनका रचनात्मकता और ज्ञान से भरा उनका उद्देश्य रहा जो यह सिद्ध कर दिया कि वे पर्यावरण के लिए न सिर्फ संवेदनशील हैं, बल्कि बदलाव के वाहक भी बन सकते हैं। कार्यक्रम का समापन सभी प्रतिभागियों द्वारा पर्यावरण सुरक्षा की शपथ लेकर किया गया। जिसमे बच्चों ने वन बंधू बनने की शपथ ली। वनों की रक्षा करने, पर्यावरण को बचाने और हरियाली को बढ़ावा देने की शपथ शामिल थी।
कार्यक्रम के अंत में डीएफओ पब्लिसिटी श्रीकांत वर्मा ने कहा कि इस प्रकार के आयोजन समाज में पर्यावरण के प्रति जागरूकता फैलाने में सहायक सिद्ध होते हैं और भविष्य में भी ऐसे कार्यक्रमों को निरंतर आयोजित किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि वन बंधू बनने का यह अभियान यहीं खत्म नहीं होता यह तो एक शुरुआत है। आओ वन बंधू बनें एक आवाज है, एक आंदोलन है। उन्होंने छात्रों से झारखंड को फिर से हरा-भरा बनाने की मुहिम में एकजुट होने का आग्रह किया।
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