एबीएन सेंट्रल डेस्क। भारत में खेती और अर्थव्यवस्था के लिए बेहद अहम दक्षिण-पश्चिम मानसून इस बार अपेक्षा से पहले केरल तट पर दस्तक दे सकता है। भारत मौसम विज्ञान विभाग ने जानकारी दी है कि अगले 4-5 दिनों में मानसून के केरल पहुंचने के लिए स्थितियां अनुकूल होती जा रही हैं। यानी 23 या 24 मई तक मानसून आ सकता है। यह पहले बतायी गयी तारीख 27 मई से भी पहले है, जबकि सामान्यत: मानसून केरल में 1 जून को पहुंचता है।
आइएमडी ने रविवार को चेतावनी जारी की है कि 18 से 24 मई के बीच पश्चिमी तटीय इलाकों में तेज बारिश हो सकती है। जिन क्षेत्रों में भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना है:
केरल के बाद मानसून धीरे-धीरे आगे बढ़ेगा और दक्षिण अरब सागर, मालदीव, कोमोरिन क्षेत्र (भारत का दक्षिणी छोर) और बंगाल की खाड़ी के दक्षिण, मध्य और पूर्वोत्तर हिस्सों में 2-3 दिन में पहुंच सकता है। आमतौर पर मानसून जून की शुरुआत में केरल पहुंचता है और जुलाई तक पूरे देश में फैल जाता है।
इसके बाद यह सितंबर के मध्य से उत्तर भारत से लौटना शुरू करता है। भारत की 75% सालाना बारिश मानसून से ही होती है। मानसून का समय पर आना खेती, खाद्य वस्तुओं की कीमतें और महंगाई पर सीधा असर डालता है। देश के कई हिस्सों में खेती पूरी तरह बारिश पर निर्भर होती है।
आइएमडी का कहना है कि मानसून जल्दी आ रहा है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि पूरा देश सामान्य या अच्छी बारिश पायेगा। मानसून की बरसात की मात्रा और नियमितता अब भी तय नहीं है, इसलिए अधिक सतर्कता जरूरी है।
दक्षिण भारत के कई हिस्सों में किसानों ने खेत तैयार करना शुरू कर दिया है, लेकिन कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि बारिश की ताकत और स्थिरता की पुष्टि होने तक जल्दबाजी न करें।
केरल और अन्य तटीय इलाकों में मानसून के जल्दी आने से बाढ़ का खतरा भी रहता है। स्थानीय प्रशासन ने नालों की सफाई, जल निकासी की व्यवस्था और सफाई अभियानों की तैयारी शुरू कर दी है।
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