टीम एबीएन, रांची। झारखंड सरकार राज्य में निषिद्ध मादक पदार्थों के दुरुपयोग की रोकथाम को लेकर गंभीरता से काम कर रही है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के निर्देश पर गृह, कारा एवं आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए मास्टर ट्रेनर प्रशिक्षण कार्यक्रम की शुरुआत की गई है। यह प्रशिक्षण डोरंडा स्थित शौर्य सभागार में 20 से 23 मई 2025 तक आयोजित किया जा रहा है।
इस चार दिवसीय कार्यक्रम का उद्घाटन गृह, कारा एवं आपदा प्रबंधन विभाग की प्रधान सचिव वंदना दादेल ने किया। प्रशिक्षण कार्यक्रम को प्रमंडलवार विभाजित किया गया है, जिसमें प्रत्येक दिन अलग-अलग प्रमंडलों के अधिकारियों और कर्मचारियों को प्रशिक्षित किया जा रहा है।
20 मई को दक्षिणी छोटानागपुर, 21 मई को उत्तरी छोटानागपुर, 22 मई को संथाल परगना और 23 मई को कोल्हान एवं पलामू प्रमंडल के मास्टर ट्रेनरों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। इस पहल का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि राज्य के हर कोने में निषिद्ध मादक पदार्थों के दुरुपयोग के विरुद्ध जागरूकता अभियान सशक्त और प्रभावी ढंग से संचालित हो।
प्रशिक्षण कार्यक्रम के पहले दिन विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों को मादक पदार्थों की लत के कारण, इसके दुष्परिणाम, संभावित उपचार और संबंधित कानूनी पहलुओं की विस्तार से जानकारी दी। यह बताया गया कि स्थानीय स्तर पर जागरूकता अभियान को किस तरह प्रभावशाली बनाया जा सकता है। साथ ही नशे की चपेट में आए युवाओं को पुनर्वास और समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के उपायों पर भी चर्चा की गई।
कार्यक्रम में बताया गया कि राज्य में नशा मुक्ति अभियान को सफल बनाने में स्वयं सहायता समूह, नेहरू युवा केंद्र संगठन और स्थानीय युवा क्लबों की भूमिका अहम है। इन संस्थाओं के माध्यम से समाज के हर वर्ग तक जागरूकता का संदेश पहुंचाया जा सकता है। युवाओं को नशे के खिलाफ प्रेरित करने और उन्हें सहयोग प्रदान करने की दिशा में इन संगठनों की सहभागिता अत्यंत उपयोगी सिद्ध हो सकती है।
प्रशिक्षण कार्यक्रम में राज्य के कई विभागों के पदाधिकारी और कर्मी शामिल हुए हैं, जिन्हें मास्टर ट्रेनर के रूप में प्रशिक्षित किया जा रहा है। इनमें स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग, उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग, महिला, बाल विकास एवं सामाजिक सुरक्षा विभाग, स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग, पर्यटन, कला, संस्कृति, खेलकूद एवं युवा कार्य विभाग, झारखंड पुलिस, झारखंड राज्य आजीविका प्रोत्साहन सोसाइटी और वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग शामिल हैं।
23 मई को इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का समापन होगा। समापन सत्र में सभी प्रमंडलों से आए मास्टर ट्रेनरों द्वारा साझा किए गए अनुभवों और सुझावों के आधार पर आगे की रणनीति तय की जाएगी। इस प्रशिक्षण के माध्यम से राज्य सरकार निषिद्ध मादक पदार्थों के खिलाफ एक सशक्त और समन्वित जागरूकता अभियान चलाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठा रही है।
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