एबीएन न्यूज नेटवर्क, नालंदा/बिहारशरीफ (पटना)। नालंदा जिले के राजगीर स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में चल रहे खेलो इंडिया यूथ गेम्स में 49 किग्रा वर्ग में महाराष्ट्र की अस्मिता दत्तात्रय धोणे ने रविवार को स्वर्ण पदक जीतते हुए दो यूथ नेशनल वेटलिफ्टिंग रिकॉर्ड तोड़े है। धोणे ने क्लीन एंड जर्क और ओवरआल टोटल दोनों में अपना ही रिकॉर्ड तोड़ा, जो उन्होंने पांच महीने पहले दोहा, कतर में हुए कॉमनवेल्थ चैंपियनशिप में बनाया था।
2022 में उन्होंने इंदौर, मध्यप्रदेश में हुए खेलो इंडिया यूथ गेम्स में रजत पदक जीता था।अस्मिता ने पहले 94 किग्रा के रिकॉर्ड को पार करते हुए 95 किग्रा का क्लीन एंड जर्क में नया यूथ नेशनल रिकॉर्ड बनाया और फिर बारबेल पर दो किलोग्राम और बढ़ाकर कुल 170 किग्रा तक पहुंच गयी जो कॉमनवेल्थ चैंपियनशिप के प्रदर्शन से 8 किग्रा ज्यादा था।
उत्तर प्रदेश की मानसी चामुंडा (75+88) ने स्नैच में यूथ नेशनल रिकॉर्ड के साथ रजत पदक जीता, जो 2022 में असम की पंचमी सोनवाल द्वारा बनाए गए रिकॉर्ड से बेहतर था। साधारण परिवार से आने वाली अस्मिता, जिनका इस महीने 18वां जन्मदिन है, महाराष्ट्र के सतारा जिले के कराड की रहने वाली हैं। उनके पिता दत्तात्रय धोणे आटोरिक्शा चलाते हैं और मां निर्मला डेयरी किसान हैं।
अस्मिता ने अपने गृहनगर में सम्राट पवार के मार्गदर्शन में ट्रेनिंग शुरू की थी, जो आज भी जारी है। लगभग 14 साल की उम्र में। मेरी बड़ी बहन भी वेटलिफ्टिंग करती थी तो उनके कोच सम्राट सर ने मुझे भी साथ में शुरू करने को कहा। मैं अपनी परफॉर्मेंस से बहुत खुश हूं क्योंकि मैंने नेशनल रिकॉर्ड तोड़ा है अस्मिता के पास कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पदक हैं, जिससे उन्हें खेलो इंडिया योजना और 2023 से पटियाला के एस एम आई के नेताजी सुभाष नेशनल इंस्टीट्यूट आॅफ स्पोर्ट्स में जगह मिली है।
पिछले साल अस्मिता ने सुवा, फिजी में वर्ल्ड यूथ चैंपियनशिप में 158 किग्रा (70+88 किग्रा) के कुल वजन के साथ स्वर्ण पदक जीता था। 2023 में नोएडा में कॉमनवेल्थ यूथ चैंपियनशिप में 136 किग्रा (60+76 किग्रा) के कुल वजन के साथ भी गोल्ड जीता। पिछले साल की एशियन यूथ चैंपियनशिप और 2023 वर्ल्ड यूथ चैंपियनशिप में एक-एक कांस्य पदक भी उनके नाम है।
अस्मिता ने 2022 से 2024 तक यूथ नेशनल्स में लगातार तीन बार गोल्ड जीता था। मुझे खेलो इंडिया से स्कॉलरशिप मिलती है और मैं पिछले दो साल से एन आई सी पटियाला में ट्रेनिंग ले रही हूं, जो नेशनल सेंटर आॅफ एक्सीलेंस है। खेलो इंडिया हमारे लिए बड़ा प्लेटफॉर्म है। यह मुझे प्रेरणा, ऊर्जा और आत्मविश्वास देता है। 10,000 रुपये की स्टाइपेंड मेरे जैसे किसी के लिए बहुत मददगार है क्योंकि मेरे पिता आटोरिक्शा चलाते हैं। हमारे पास घर पर एक छोटा खेत और दो गायें हैं, जिनकी देखभाल मेरी मां करती हैं। रअक से मुझे स्पोर्ट्स किट, यात्रा और रहने का खर्च भी मिलता है।
कोच पवार ने कहा, सबसे पहले, मैं कहना चाहूंगा कि उसे अपने माता-पिता से मजबूत जीन मिले हैं। साथ ही, वह बहुत अनुशासित है। यही उसकी लगन का सबूत है। वेटलिफ्टिंग एक तकनीकी खेल है, जिसमें ताकत और तकनीक दोनों चाहिए। क्लीन एंड जर्क में उसकी तकनीक शानदार है। अगर वह स्नैच में सुधार करती है, तो अस्मिता को कोई नहीं रोक सकता। अगले साल चीन के निंगबो में होने वाली वर्ल्ड जूनियर वेटलिफ्टिंग चैंपियनशिप में गोल्ड जीतने के लक्ष्य के साथ अस्मिता अगस्त में अहमदाबाद में होने वाली कॉमनवेल्थ यूथ और जूनियर चैंपियनशिप के बाद चयन ट्रायल्स में हिस्सा लेंगी।
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