बंद के बहाने आदिवासी समाज ने सरकार पर बनाया दबाव

 

सिरमटोली फ्लाईओवर के विरोध में आदिवासी समाज, रांची बंद बुलाकर सरकार पर बनाया दबाव

टीम एबीएन, रांची। झारखंड में मनाये जाने वाला प्रमुख त्योहारों में से एक सरहुल नजदीक है। लेकिन इससे पूर्व आदिवासी समाज आक्रोशित नजर आ रहा है। दरअसल, आदिवासी समाज के आस्था का स्थल सिरमटोली सरना स्थल के समीप फ्लाईओवर के रैंप का निर्माण हो रहा है, जिसको लेकर आदिवासी समाज सरकार के खिलाफ गोलबंद हो चुके हैं। आंदोलन के तहत विभिन्न आदिवासी संगठनों के द्वारा रांची बंद बुलाया गया। 

झारखंड की राजनीति में इन दिनों हाल चल तेज हो चुकी है। कारण है राजधानी रांची में आदिवासी समाज का आक्रोश। सिरमटोली सरना स्थल के समीप फ्लाईओवर रैंप निर्माण का विरोध आदिवासी समाज द्वारा किया जा रहा है। इसको लेकर चरणबद्ध आंदोलन किया गया। विधानसभा सत्र के दौरान बहस हुई। 

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने आदिवासी समाज को संदेश देते हुए कहा था, सरहुल खुशी-खुशी मनायें, चिंता करने की बात नहीं है। लेकिन इसके बावजूद आदिवासी संगठन रैंप के निर्माण को बंद कराने की मांग पर डटे हैं। आंदोलन के तहत शनिवार को राजधानी रांची में संपूर्ण आदिवासी संगठनों के द्वारा रांची बंद बुलाया गया। तमाम आदिवासी संगठन के लोग रांची के सड़कों में बंद कराने उतरे। 

जगह-जगह टायर जलाकर विरोध प्रदर्शन किया गया। केंद्रीय सरना समिति एवं चडरी सरना समिति के अध्यक्ष बबलू मुंडा के नेतृत्व में हजारों की संख्या में बंद समर्थक बंद कराने निकले। केंद्रीय सरना समिति के अध्यक्ष बबलू मुंडा ने राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि रांची के चारो ओर सरना धमार्वालंबी ने सड़क पर उतरकर रांची बंद कराने का कार्य किया। सरना समाज अपने धर्म की रक्षा के लिए एकजुट है। 

झारखंड विधानसभा में कई विधायकों ने केन्द्रीय सरना स्थल सिरमटोली फ्लाईओवर रैंप का मामला उठाया एवं विधानसभा अध्यक्ष ने विधानसभा जांच समिति बनाकर समस्या का समाधान करने की बात कही थी। लेकिन अभी तक समस्या का समाधान नहीं हो सका। झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन मौन है। 

आज की बंदी को सफल बनाने के लिए व्यवसाय प्रतिष्ठानों, बस ओटो ई-रिक्शा बंद में शामिल तमाम आदिवासी संगठनों एवं बंद को समर्थन देने वाले उन सभी राजनीति पार्टी को केंद्रीय सरना समिति इन सबका धन्यवाद एवं आभार व्यक्त करती है। मुख्य पहान जगलाल पहान ने कहा कि सरना स्थल से छेड़छाड़ करना आदिवासी समाज के साथ आघात है। इस बंदी को सफल करने के लिए सभी को धन्यवाद आभार।

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