एबीएन सोशल डेस्क। वास्तु शास्त्र में पक्षियों के घोंसले और उनके रहने के स्थान के बारे में बताया गया है। इसके साथ ही वास्तु शास्त्र सार और समरांगण सूत्रधार जैसे ग्रंथों में भी पक्षियों के घर पर आने के सकारात्मक और नकारात्मक प्रभावों का वर्णन किया गया है। अगर बात करें कबूतर की, तो गरुड़ पुराण में इसको पितरों का प्रतीक माना गया है। वहीं, बृहत संहिता में भी कबूतर का बार-बार घर में घोंसला बनाना शनि या पितृ दोष से जोड़ा जाता है। यहां शुभ
कुछ मान्यताओं के अनुसार कबूतर को शांति, प्रेम और समृद्धि का प्रतीक माना गया है। अगर यह घर के बाहरी हिस्से, छत या बालकनी में घोंसला बनाता है तो इसे शुभ माना जाता है। कुछ मान्यताओं में इसे पितरों का आशीर्वाद भी माना गया है। कई जगहों पर माना जाता है कि घर में कबूतर का घोंसला बनना या अंडा देना शुभ घटना घटने का संकेत होता है।
अगर कबूतर का घोंसला उत्तर या पूर्व दिशा में हो यह भी धन, सुख और पॉजिटिव एनर्जी लाने वाला माना जाता है। इन दिशाओं को बेहद ही शुभ माना गया है और यहां पक्षियों का वास घर की उन्नति का संकेत हो सकता है।
शास्त्रों के अनुसार अगर कबूतर घर के मेन गेट या खिड़की के पास घोंसला बना ले या अंडा दे तो इसे नकारात्मक संकेत माना जाता है। इससे घर के कार्यों में बाधाएं आने लगती हैं। इसके साथ ही परिवार के दुखों का कारण बनता है।
अगर कबूतर ने रसोईघर या फिर घर के अंदर घोंसला बना लिया है या अंडे दिये हैं तो इससे स्वास्थ्य समस्याओं और आर्थिक हानि के योग बनते हैं। वहीं, अगर घर में काफी कबूतर इकट्ठे हो जायें तो यह शनि और राहु दोष को बढ़ाता है और घर में अनचाही परेशानियां आने की संभावना बढ़ जाती है।
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