टीम एबीएन, रांची। झारखंड में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले पूरे राज्य में राजनीतिक उथल-पुथल जारी है। इस दौरान नामांकन की तिथि प्रारंभ होने के बावजूद अब तक राज्य की कोई भी बड़ी या क्षेत्रीय पार्टियों को अपने प्रत्याशियों के नाम की घोषणा करने की हिम्मत नहीं हो रही है।
यहां तक कि खुद को विश्व की सबसे बड़ी पार्टी कहने वाली भाजपा भी अपने प्रत्याशियों के नाम की घोषणा नहीं कर पा रही है। अब तक दूसरे दलों के नेताओं को अपने साफ सुथरे वाशिंग मशीन में धोने वाली पार्टी बीजेपी भी अपने प्रत्याशियों के नाम की घोषणा करने की हिम्मत नहीं जुटा पा रही है।
कारण साफ है जैसे ही पार्टी अपने प्रत्याशियों के नाम की घोषणा करेगी, उस विधानसभा क्षेत्र में वर्षों से पार्टी का हाथ मजबूत करने वाले कद्दावर नेता पाला बदलने को तैयार हैं। बस नाम के एलान का इंतजार है।
यही डर लोगों को सता रही है कि जैसे ही हम अपने प्रत्याशी के नाम की घोषणा करेंगे, विधानसभा क्षेत्र यानी पूरे राज्य में भगदड़ मच जायेगी। यहां तक कि कल जमुआ के भाजपा विधायक केदार हाजरा के भाजपा छोड़ झामुमो में शामिल होने के बाद तो स्थिति और भी डरावनी हो गयी है।
पार्टी को पता तक नहीं है कि कौन से विधायक कब किस समय किधर पाला बदल लेंगे। खुद को सबसे मजबूत कहने वाली पार्टी बीजेपी आज सदमे में है। यही स्थिति अन्य दलों में भी है। कांग्रेस समेत अन्य पार्टियां इतनी डरी सहमी हुई हैं कि उन्हें अपने प्रत्याशी के नाम की घोषणा करने में नानी याद आ रही है।
और होने भी चाहिए। यदि यही स्थिति रही तो एग्जिट पोल और चुनावी भविष्यवाणी करने वाले राजनीतिज्ञों का भी हाल खराब ही होने वाला है। जब प्रत्याशियों का मूड पता नहीं, तो फिर जनता का क्या मूड होगा यह कहना तो बड़ा मुश्किल है। ऐसे में किसी भी विशेष दल को पूर्ण बहुमत की उम्मीद नहीं है।
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