जानें हरियाणा में भाजपा की जीत के मायने...

 

  • हरियाणा में जीत की शानदार हैट्रिक, इन 4 पॉइंट से समझिए क्या हैं भाजपा के लिए चुनाव नतीजों के मायने 
  • हरियाणा चुनावों में भाजपा की सफल रणनीति ने तीसरी बार सत्ता में पहुंचाया, जबकि जम्मू-कश्मीर में लोकल लीडरशिप की कमी और कार्यकर्ताओं की नाराजगी ने उसकी उम्मीदों को धक्का पहुंचाया। अनुछेद 370 हटाने के बावजूद भाजपा का प्रदर्शन जम्मू में ही सीमित रहा 

एबीएन सेंट्रल डेस्क। भाजपा ने हरियाणा में जीत दर्ज कर नया रेकॉर्ड बनाया है। पहली बार लगातार किसी पार्टी की तीसरी बार सरकार बनी है। वहीं जम्मू-कश्मीर में भाजा का प्रदर्शन उसकी उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा। जम्मू रीजन में भाजपा पहले भी लगभग इतनी सीटें जीत चुकी है और इस चुनाव में भाजपा ने कुछ खास नहीं किया। 2014 में जब जम्मू रीजन में 37 सीटें थी तब भाजपा इसमें से 25 सीटें जीती थी। अब जम्मू रीजन में 43 सीटों में से 29 सीटें जीती है। कश्मीर रीजन में पहले की तरह इस बार भी भाजपा का खाता नहीं खुला है। हरियाणा और जम्मू-कश्मीर के नतीजों में भाजपा के लिए क्या संदेश है और इसके क्या मायने हैं : 

1. लोकल लीडरशिप अहम 

इन नतीजों ने फिर दिखाया है कि विधानसभा के चुनाव जीतने के लिए केंद्रीय नेतृत्व ही काफी नहीं है बल्कि लोकल लीडरशिप भी अहम है। हरियाणा में भाजपा ने सीएम नायब सिंह सैनी का चेहरा आगे कर चुनाव लड़ा। एंटी इनकंबेंसी से बचने के लिए भाजपा ने पूर्व सीएम मनोहर लाल खट्टर को हटाया और सीएम हटाने का बीजेपी का ये फॉर्मूला गुजरात, उत्तराखंड, त्रिपुरा, कर्नाटक के बाद हरियाणा में भी सफल रहा। जम्मू-कश्मीर में भाजपा के पास कोई लोकल लीडरशिप नहीं है जिसके चेहरे पर भाजपा चुनाव लड़ सकती। वहां के चुनाव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह ही पोस्टर बॉय थे। 

2. तब तक हार नहीं जब तक नतीजे न आयें 

हरियाणा के नतीजों ने ये साबित किया है कि सही रणनीति और बूथ मैनेजेमेंट से हारी बाजी को भी जीता जा सकता है। भाजपा ने हरियाणा में यही किया। बूथ मैनेजमेंट पर फोकस रहा। कार्यकर्ता जो निराश थे उनमें पार्टी ने जोश भरा। हरियाणा के नतीजों से भाजपा कार्यकर्ताओं का आत्मविश्वास बढ़ा है। जल्द ही महाराष्ट्र और झारखंड के चुनाव का ऐलान हो जायेगा। हरियाणा की जीत का पॉजिटिव असर इन दो राज्यों के चुनावी कैंपेन में दिखेगा। फिर अगले साल दिल्ली में विधानसभा चुनाव हैं और पड़ोसी राज्य में जीत का फायदा भाजपा दिल्ली में भी माहौल बनाने के लिए कर सकती है। 

3. कार्यकर्ताओं नाराज तो मना लें 

जहां हरियाणा में कार्यकर्ताओं में जोश भरकर भाजपा जीत की राह पर आगे बढ़ी वही जम्मू-कश्मीर में कार्यकर्ताओं की नाराजगी ही भाजपा पर भारी पड़ी। जम्मू रीजन में पार्टी कार्यकर्ता इसलिए नाराज थे क्योंकि पार्टी ने दूसरी पार्टी से आये लोगों को तव्वजो दी और शुरू से पार्टी के साथ खड़े कार्यकर्ताओं को दरकिनार किया। वहीं कुछ पार्टी नेता और उम्मीदवार को लेकर ही पार्टी कार्यकर्ता नाराज थे और उन्होंने पार्टी के इन उम्मीदवारों के हराने का काम किया। जम्मू-कश्मीर की नौशेरा सीट पर पार्टी नेता और उम्मीदवार रवींद्र रैना के खिलाफ जबर्दस्त नाराजगी थी। वह नतीजों में भी दिखी। 

4. आर्टिकल 370 भले हटा, पर जम्मू-कश्मीर बदला नहीं 

भाजपा ने जम्मू कश्मीर में अपना पूरा चुनाव आर्टिकल 370 हटाने के बाद हुए फायदे पर केंद्रित किया था। भाजपा लगातार दावा कर रही थी कि जम्मू-कश्मीर में जमकर विकास हुआ है और शांति आयी है। लेकिन जम्मू-कश्मीर के नतीजों ने दिखाया कि लोगों ने इसे नहीं माना। अब भी जम्मू-कश्मीर में भाजपा की परफॉर्मेंस लगभग वही है जैसी 10 साल पहले थी। साथ ही भाजपा जम्मू में हिंदू बहुल सीटें ही जीतती रही है और अब भी वही हुआ। जहां मिक्स्ड आबादी है वहां अब भी भाजपा के लिए चुनाव जीतने में मुश्किल हो रही है। भाजपा अभी मुस्लिम आबादी का भरोसा और दिल नहीं जीत पायी है।

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