मोहब्बत बुलंदी है और नफरत खाई : तहजीबुल हसन

 

नौवीं मोहर्रम को अधिवक्ता स्व अनवर हुसैन के आवास अनवर आर्केड से निकाला मातमी जुलूस

टीम एबीएन, रांची। नौवीं मुहर्रम को हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी अधिवक्ता स्व अनवर हुसैन के आवास अनवर आर्केड से मातमी जुलूस निकला। जुलूस विश्वकर्मा मंदिर लेन, मैन रोड, अंजुमन प्लाजा, डॉ फत्ताहउल्लाह रोड होते हुए मस्जिद जाफरिया पहुंचा। मातमी जुलूस से पूर्व स्वर्गीय अधिवक्ता अनवर हुसैन के आवास पर ही मजलिस शोहदा ए कर्बला का आयोजन किया गया। 

मजलिस की शुरुआत सैयद अशरफ हुसैन रिजवी के मर्सिया खानी से हुआ। इस मजलिस को आल इंडिया शिया पर्सनल लॉ बोर्ड झारखंड के अध्यक्ष सह मस्जिद जाफरिया रांची के इमाम व खतीब हजरत मौलाना हाजी सैयद तहजीबुल हसन रिजवी ने संबोधित करते हुए कहा के मोहब्बत बुलंदी है और नफरत खाई। आज के जमाने में लोगों से सच्ची मोहब्बत करने वाले बहुत कम मिलते हैं। 

जो लोग किसी से लालच के कारण मोहब्बत करते हैं वह एक न एक दिन उनकी मोहब्बत नफरत में बदल जाती हैं। कर्बला वाले वह है जिन्होंने इमामे हुसैन से किसी लालच में मोहब्बत नहीं की, बल्कि सिर्फ इसलिए मोहब्बत कि के अल्लाह के सच्चे बंदे का नाम इमामे हुसैन है। इमाम हुसैन से मोहब्बत करने वालों का मकाम इतना ऊंचा है की कयामत तक उनका नाम लिया जाता रहेगा।

जिन्होंने हजरत इमामे हुसैन से नफरत की आज दुनिया में जलील हो गया। इमामे हुसैन और हुसैनीयत से मोहब्बत करो ताकि जमाना तुझे मोहब्बत से देखें। मजलिस के बाद कासिम अली, आमिर गोपालपुरी, हसनैन राजा ने नौहा खानी की। 

आए हुए तमाम आजादारो का युवा समाजसेवी सैयद फराज अब्बास ने स्वागत किया। जुलूस में अकील उर रहमान, मोहम्मद इस्लाम, शाहिद अयूबी, सोहेल सईद, आफताब आलम, नसर इमाम, सरफराज सुडदु ने जगह जगह जुलूस का स्वागत किया।

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