एबीएन सोशल डेस्क। विचार बीज है तो कर्म पौधा है, सत्प्रवृति के विचार में सत्कर्म के बीज बोने के लिए संस्कार पूर्णतः समर्थ होते हैं। विषय पर आध्यात्मिक चर्चा हुई। गायत्री युगतीर्थ शक्तिपीठ सेक्टर टू धूर्वा सत्संग में महिला मंडल सदस्यों द्वारा गायत्री महामंत्र का 108 मिनट सामूहिक जप किया गया।
जप उपरान्त उनने प्रज्ञागीत, गायन-वादन व भजन-कीर्तन किया। तत्पश्चात पूज्यवर वेदमूर्ति-तपोनिष्ठ पंडित श्रीरामशर्मा आचार्यजी द्वारा लिखित युग निर्माण सत्संकल्प व विचार क्रांति अभियान के अंतर्गत गायत्री महामंत्र जप महिमा, यज्ञीय अनुष्ठान महिमा और संस्कार प्रकरण पर स्वाध्याय पाठ व संवाद हुआ
बाल संस्कारशाला महिला संचालिका प्रतिनिधि एवं रांची जिला महिला समन्वयक सदस्य बहनों ने बताया कि भारतीय संस्कृति व धर्म के अनुसार संस्कार 16 हैं, जिन्हें षोडश संस्कार कहे गये हैं।बताया कि प्राचीन काल में माता के गर्भ में आने के दिन से लेकर मृत्यु तक की अवधि में समय समय पर प्रत्येक भारतीय अध्यात्म-दर्शन के प्रेमी व धर्मावलम्बी को 16 बार संस्कारित करके एक प्रकार का आध्यात्मिक रसायन की तरह से आध्यात्मिक उपचार किया जाता था।
बीज बोने के बाद ही पौधा उगने की आशा बंधती है। विचार बीज है तो कर्म पौधा है। सत्प्रवृत्ति के रूप में सत्कर्म के बीज बोने के लिए संस्कार पूर्णतः समर्थ होते हैं। संस्कारों की व्यवस्था यज्ञीय वातावरण में, यज्ञीय आयोजनों में,प्रज्ञा संस्थानों में या तीर्थस्थलों में ज्यादा संस्कारित व लाभान्वित होते हैं। परम पूज्य गुरुदेव ने इस युग के लिए 12 संस्कार व संस्कारोत्सव पर विशेष ध्यान आकर्षित किया है इसकी स्वाध्याय- चर्चा अगले सत्संग में होगी।
सत्संग शुभारंभ गायत्री महामंत्र सस्वर पाठ, गुरु-ईश ध्यान,नमन-वंदन और समापन शांतिपाठ व सबके लिए स्वस्थ-सुखद जीवन व उज्जवल भविष्य की मंगलमय स्वस्तिवाचन पाठ व हमारा युग निर्माण सत्संकल्प व विचार क्रांति अभियान पूर्ण हो सहित अनेक जयघोष हुए। उक्त जानकारी गायत्री परिवार रांची के वरिष्ठ-साधक जय नारायण प्रसाद ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर दी।
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