रायसेन के तीन कारखानों से 25 लड़कियों सहित 36 बाल मजदूरों को कराया मुक्त

 

  • एनसीपीसीआर) की अगुआई में बचपन बचाओ आंदोलन के सहयोग से चलाया गया अभियान
  • तीन कारखाने सील, नियोक्ताओं के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू

एबीएन सेंट्रल डेस्क। राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) की अगुआई में पुलिस और एसोसिएशन फॉर वालंटरी एक्शन जिसे बचपन बचाओ आंदोलन (बीबीए) के नाम से जाना जाता है, के सहयोग से चलाये गये अभियान में भोपाल के पास रायसेन जिले के मंडीदीप कस्बे में तीन फैक्टरियों से 25 लड़कियों सहित कुल 36 बच्चों को मुक्त कराया गया। 

यह अभियान बीबीए की ओर से दर्ज करायी गयी शिकायत के बाद चलाया गया जिसने पाया कि इस औद्योगिक कस्बे में बहुत से वाणिज्यिक प्रतिष्ठान ऐसे हैं जो देशभर में बच्चों की ट्रैफिकिंग (दुर्व्यापार) में लिप्त हैं और उनका इस्तेमाल फैक्टरियों में मजदूरी के लिए कर रहे हैं। छापों के बाद तीन फैक्टरियों को सील कर कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गयी है। मुक्त कराये गये इन बच्चों की हालत बेहद दयनीय थी। वे मैले-कुचैले, भूखे-प्यासे, कुपोषित और थके से दिख रहे थे। 

इनसे बेकरी और इलेक्ट्रॉनिक आपूर्ति श्रृंखला उत्पाद बनाने वाली इकाइयों में रोजाना 12 से 14 घंटे काम कराया जाता था। इन सभी बच्चों की उम्र 15 से 17 साल के बीच है और ये बिहार, झारखंड और छत्तीसगढ़ के अलावा भोपाल के आस पास के जिलों के हैं। मुक्त करायी गयी ज्यादातर लड़कियां आदिवासी इलाकों की हैं। 

इन बच्चों को बाल कल्याण समिति के समक्ष पेश किया गया और इन्हें जल्द ही बाल देखभाल केंद्रों में भेज दिया जायेगा। सील किये गये इन कारखानों में एक बेकरी इकाई है जहां बिस्कुट और रस बनाये जाते हैं जबकि दूसरी एक खाद्य प्रसंस्करण इकाई है। तीसरी फैक्टरी में प्लास्टिक के इलेक्ट्रॉनिक सामान बनाये जाते थे।

इस तरह आपूर्ति श्रृंखला प्रतिष्ठानों में बाल मजदूरी की स्थिति पर चिंता जताते हुए बचपन बचाओ आंदोलन के निदेशक मनीष शर्मा ने कहा कि आपूर्ति श्रृंखला उत्पाद प्रतिष्ठानों में बेहद घिनौने और बदतरीन तरीके से बाल मजदूरों का इस्तेमाल किया जाता है। उत्पादन से लेकर वितरण तक हर चरण में ये नियोक्ता सस्ते श्रम के लालच में अंधे हो चुके हैं। बच्चे इनके सबसे आसान शिकार हैं जिनकी नियमित रूप से ट्रैफिकिंग की जाती है और इन्हें मजदूरी के लिए खरीदा और बेचा जाता है। 

इन बच्चों के मां-बाप और परिवार ट्रैफिकिंग गिरोहों और नियोक्ताओं के झूठे वादों के झांसे में आ जाते हैं। हमारे देश में बेहद सख्त कानून हैं और कानून प्रवर्तन एजेंसियां मांग और आपूर्ति के इस दुष्चक्र को तोड़ने का हरसंभव प्रयास कर रही हैं। हमें उम्मीद है कि बच्चों के अधिकारों को रौंदे जाने से बचाने के लिए सरकार जल्द ही बहुप्रतीक्षित एंटी ट्रैफिकिंग बिल को पास करायेगी।

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