अगर बहुमत नहीं मिला, तो जानें भाजपा का क्या होगा प्लान बी

 

अमित शाह ने बताया, केजरीवाल के चुनाव प्रचार पर कही बड़ी बात

अमित शाह ने एक इंटरव्यू में बहुमत नहीं आने के बाद का प्लान बताया

एबीएन सेंट्रल डेस्क। लोकसभा चुनाव के बीच देश के गृह मंत्री अमित शाह ने न्यूज एजेंसी एएनआई को एक इंटरव्यू दिया है। इस दौरान उन्होंने कई सवालों का जवाब दिया है। क्या बीजेपी के पास बहुमत के आंकड़े तक नहीं पहुंचने की स्थिति में कोई प्लान बी है? अमित शाह ने इस सवाल का काफी दिलचस्प जवाब दिया है। उन्होंने कहा है कि ह्यप्लान बी तभी बनाने की जरूरत है, जब प्लान ए (सफल होने) की 60% से कम संभावना हो। मुझे यकीन है कि पीएम मोदी प्रचंड बहुमत के साथ सत्ता में आयेंगे। 

दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल के चुनाव प्रचार पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि एक मतदाता के रूप में, मेरा मानना है कि वह जहां भी जायेंगे लोग शराब घोटाले को याद करेंगे। कई लोगों को तो बड़ी बोतल दिखेगी। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के अगर आप मुझे वोट देंगे तो मुझे जेल नहीं जाना पड़ेगा। वाले बयान पर कहा कि इससे बड़ी सुप्रीम कोर्ट की कोई अवमानना नहीं हो सकती है। क्या सुप्रीम कोर्ट (चुनावी) जीत और हार पर फैसला करेगा? 

भाजपा के 400 पार और संविधान में बदलाव की अटकलों पर गृह मंत्री ने कहा कि हमारे पास पिछले 10 सालों से संविधान बदलने के लिए बहुमत है। ऐसा कभी नहीं किया। बहुमत का दुरूपयोग का इतिहास मेरी पार्टी का नहीं है। बहुमत के दुरूपयोग का इतिहास, इंदिरा गांधी के समय कांग्रेस ने किया। लेकिन हां, हम 400 सीटें चाहते हैं क्योंकि हम देश की राजनीति में स्थिरता लाना चाहते हैं। क्योंकि हम देश की सीमाओं को सुरक्षित रखना चाहते हैं हम यूसीसी लाना चाहते हैं। हमने 10 सालों में अपनी सीटों का उपयोग कैसे किया? अनुच्छेद 370 को निरस्त करने में, तीन तलाक को खत्म कर राम मंदिर का निर्माण। 

यह क्लीन चिट नहीं- अमित शाह 

शराब नीति मामले में दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल को अंतरिम जमानत पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा, मैं सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर कोई टिप्पणी नहीं करना चाहता। लेकिन जिस तरह से आप, कुछ मीडिया समूह और ज्यादातर पत्रकार इसे केजरीवाल की जीत मानते हैं। मैं इसे थोड़ा स्पष्ट करना चाहूंगा, यह क्लीन चिट नहीं है। आरोपपत्र अभी भी सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष है, यदि उन्हें इतना भरोसा था, तो उन्हें सत्र न्यायालय के समक्ष इसे रद्द करने की प्रार्थना करनी चाहिए थी।

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