क्या पीओके में सचमुच कुछ बड़ा होनेवाला है?

 

पाक होगा नीलाम और बोली लगायेगा हिंदुस्तान 

आर्थिक संकट के बीच पीओके में कैसे बजा गुलामी के खिलाफ आजादी का बिगुल? 

अभिनय आकाश 

एबीएन एडिटोरियल डेस्क। पाकिस्तानी सेना की गोलियों से अब तक 3 नागरिक मारे जा चुके हैं और कई घायल भी हैं। पीओके में इस संघर्ष की एक वजह कश्मीर की खुशहाली भी है। पीओके के लोग कश्मीर की तरह सहूलियत की मांग करते रहे हैं। लेकिन पाकिस्तान सरकार ने दो वक्त की रोटी के लिए उन्हें मोहताज बना दिया है। इस वजह से पीओके के लोग भारत में विलय की मांग भी करने लगे हैं। 

पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में पिछले पांच दिनों से हाहाकार मचा हुआ है। पीओके के लोग पाकिस्तान के जुल्म, महंगाई और बदहाली से परेशान हो चुके हैं। हालात ये हैं कि पीओके की जनता और पाकिस्तान की सेना एक दूसरे की जान के प्यासे हो चुके हैं। इन दोनों के बीच कई दौर की हिंसा हो चुकी है। पाकिस्तानी सेना की गोलियों से अब तक 3 नागरिक मारे जा चुके हैं और कई घायल भी हैं। 

पीओके में इस संघर्ष की एक वजह कश्मीर की खुशहाली भी है। पीओके के लोग कश्मीर की तरह सहूलियत की मांग करते रहे हैं। लेकिन पाकिस्तान सरकार ने दो वक्त की रोटी के लिए उन्हें मोहताज बना दिया है। इस वजह से पीओके के लोग भारत में विलय की मांग भी करने लगे हैं। पिछले कुछ दिनों में भारत के प्रधानमंत्री, गृह मंत्री, रक्षा मंत्री और विदेश मंत्री ने ऐसे कई बयान दिए हैं जिसमें पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर का जिक्र रहा है। 

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था कि पाकिस्तान ने अगर चूड़ियां नहीं पहनी है तो भारत पहना देगा। गृह मंत्री अमित शाह ने लगातार कहा कि पीओके भारत का हिस्सा है। इसे वापस लेंगे। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा था कि पीओके को ताकत से हासिल करने की जरूरत ही नहीं पड़ेगी। वो खुद ही भारत में शामिल हो जाएगा। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि पीओके पर पाकिस्तानी कब्जा खत्म करके उसे भारत में शामिल कर लिया जाएगा। भारतीय नेताओं के ये बयान पिछले पांच से दस दिनों के अंदर आए हैं। पीओके के लोगों का विद्रोह भी इसी दौरान हो रहा है। सवाल ये है कि क्या पीओके में कुछ बड़ा होने वाला है?

पीओके में विरोध प्रदर्शन

बिजली और खाद्य पदार्थों की ऊंची कीमतों के विरोध में व्यापारी शुक्रवार को सड़कों पर उतर आए। अगस्त 2023 में भी उच्च बिजली बिलों के खिलाफ ऐसे ही विरोध प्रदर्शन हुए थे। स्ट्राइक की वजह से पीओके की राजधानी और सबसे बड़े शहर मुजफ्फराबाद में सार्वजनिक परिवहन, दुकानें, बाजार और व्यवसाय बंद हो गये। मीरपुर और मुजफ्फराबाद डिवीजनों में बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड तोड़ दिए और पुलिस के साथ झड़प भी देखने को मिली। 

12 मई को विधानसभा और अदालतों जैसी सरकारी इमारतों की सुरक्षा के लिए अर्धसैनिक रेंजरों को बुलाने की नौबत आ गई। बढ़ती ऊर्जा लागत के कारण पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था दो साल से अधिक समय से अत्यधिक उच्च मुद्रास्फीति और निराशाजनक आर्थिक विकास दर का सामना कर रही है। पाकिस्तानी अखबार डॉन अखबार की रिपोर्ट के अनुसार, मई 2022 से उपभोक्ता मुद्रास्फीति 20% से ऊपर रही है और मई 2023 में 38% तक पहुंच गयी है।

भेदभाव का आरोप लगाया

पीओके के नेता क्षेत्र में बिजली वितरण में इस्लामाबाद सरकार द्वारा कथित भेदभाव का विरोध कर रहे हैं। डॉन ने क्षेत्र के प्रमुख चौधरी अनवारुल हक द्वारा नीलम-झेलम परियोजना द्वारा उत्पादित 2,600 मेगावाट जलविद्युत का उचित हिस्सा नहीं मिलने की शिकायतों पर रिपोर्ट प्रकाशित की है। 

हक ने यह भी कहा है कि हालिया बजट में सरकारी कर्मचारियों के वेतन में वृद्धि के लिए संसाधनों के उनके अनुरोध को स्वीकार नहीं किया गया था और उन्हें भुगतान करने के लिए विकास निधि का उपयोग करने के लिए मजबूर किया गया।

भारत संग व्यापार पर रोक

फरवरी 2019 के पुलवामा आतंकी हमले के बाद भारत द्वारा सूखे खजूर, सेंधा नमक, सीमेंट और जिप्सम जैसे पाकिस्तानी उत्पादों पर सीमा शुल्क बढ़ाकर 200% करने के बाद पीओके में व्यापारियों को भारी नुकसान हुआ। परिणामस्वरूप, भारत में पाकिस्तान का निर्यात औसत से गिर गया। डॉन की रिपोर्ट के अनुसार, 2018 में $45 मिलियन प्रति माह से बढ़कर मार्च और जुलाई 2019 के बीच केवल $2.5 मिलियन प्रति माह हो गया। 

अगस्त 2019 में जम्मू और कश्मीर में भारत द्वारा किए गए संवैधानिक परिवर्तनों के बाद पाकिस्तान द्वारा सभी व्यापार बंद करने के बाद स्थिति और अधिक कठिन हो गई थी। भारत-पाकिस्तान व्यापार पिछले पांच वर्षों में सालाना लगभग 2 बिलियन डॉलर के निचले स्तर पर आ गया है।

पाकिस्तान का आर्थिक संकट

रूस-यूके्रन युद्ध के बाद वैश्विक खाद्य और ईंधन की कीमतें बढ़ने के बाद से पाकिस्तान के विदेशी मुद्रा भंडार में भारी गिरावट आई है। इसी तरह के भुगतान संतुलन संकट ने 2022-23 में श्रीलंका को भी पंगु बना दिया, जिससे भारत को समर्थन उपायों का विस्तार करना पड़ा। 

स्टेट बैंक आफ पाकिस्तान के अनुसार, देश का विदेशी मुद्रा भंडार अगस्त 2021 में 20.1 बिलियन डॉलर के शिखर से गिरकर फरवरी 2023 में 2.9 बिलियन डॉलर हो गया, जो केवल एक महीने के आयात को कवर करने के लिए पर्याप्त है। पाकिस्तान अपनी कुल प्राथमिक ऊर्जा आपूर्ति का लगभग 40% आयात करता है।

सरकारी कंपनी को बेच पीओके बचायेंगे शहबाज

पीएम शरीफ ने पीओके के लिए 23 अरब पाकिस्तानी रुपये (718 करोड़ हिंदुस्तानी रुपये) के पैकेज की घोषणा की है। पांच दिनों से चल रहे प्रदर्शन के बीच  पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने उच्चस्तरीय बैठक की। इस बैठक में पाक के पीएम अनवारुल हक, पीएमएल-एन के नेता राजा फारूक हैदर, कश्मीर मामलों के मंत्री अमीर मुकाम और कई प्रमुख राजनेता शामिल हुए। 

अब खबर आयी है कि शहबाज शरीफ पीओके का दौरा करने वाले हैं। पीओके के मुजफ्फराबाद में शहबाज शरीफ का दौरा होगा। इसके साथ ही खबर आयी है कि पाकिस्तान ने पीओके को बचाने के लिए 24 सरकारी कंपनियों को बेचने का फैसला किया है।

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