84 लाख जीवों के शरीरों में यातना भोगने के बाद प्राप्त हुआ है मनुष्य शरीर : संत रामपाल जी महाराज

 

तहसील आरोन के सियाराम कालोनी में एलईडी टीवी पर सतसंग प्रसारित हुआ 

कमल सिंह लोधा 

गुना। जिले की तहसील आरोन के सियाराम कालोनी में रविवार को जिला स्तरीय सत्संग का आयोजन एलईडी टीवी के माध्यम से किया गया। जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं संत जी के मंगल प्रवचनों को सुनने के लिए पहुंचे। सत्संग में संत जी ने मानव कल्याण को लेकर समाज में फैली बुराइयों जैसे रिश्वतखोरी, नशाखोरी व दहेज प्रथा जैसी बुराइयों को जड़ से खत्म करने पर जोर दिया और परमात्मा पाने की शास्त्र अनुकूल सत साधना बतायी। 

संत रामपाल जी महाराज जी ने सत्संग में बताया कि कबीर साहेब कहते हैं- मानुष जन्म दुर्लभ है मिले ना बारम्बार जैसे तरुवर से पता टूट गिरे, फिर ना लगता डार... अर्थात मनुष्य शरीर 84 लाख जीवों के शरीरों में यातना भोगने के बाद प्राप्त हुआ है। इसमें यदि पूर्ण गुरु की शरण में जाकर सत्य भक्ति नहीं की, तो यह जीवन व्यर्थ चला जायेगा। 

जैसे पेड़ पर लगा पत्ता पीला होकर गिरने के बाद वापस उसी पेड़ पर पुनर्स्थापित नहीं होता। इसी प्रकार मनुष्य शरीर कुछ समय के लिए सत्कर्म करने के लिए प्राप्त हुआ है। सत्संग सुनकर कई पुण्य आत्माओं ने नशा व अन्य कुरुतियों को त्यागने का संकल्प लिया। 

सत्संग स्थल पर उपस्थित सेवादारों ने बताया है कि संत रामपाल जी महाराज ही सच्चे समाज सुधारक संत और मानव समाज के वास्तविक हितैषी है, संत जी के आध्यात्मिक प्रयास से समाज के लोग सभी बुराईयां छोड़कर आध्यात्मिकता की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं। संत रामपाल जी महाराज जी का उद्देश्य आध्यात्मिक मार्ग पर फैले पाखंडवाद को समाप्त करना है।

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